सतना : नवीन तकनीकों की चकाचौंध से लबरेज़ चौतरफा बहती विकास की गंगा के बीच जिम्मेदारों को शायद यह जानने की फुसरत नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की दशा क्या है. आजादी के 78 वर्ष होने पर भी यदि गांव में सडक़ न होने के कारण महिला को इलाज के आभाव में दम तोड़ देना पड़े तो इससे अधिक शर्मनाक घटना भला और क्या हो सकती है. कुछ ऐसा ही मामला जिले के नागौद विकासखण्ड की द्वारी ग्राम पंचायत के हनुमान टोला में देखने को मिला.
जिले के नागौद विकासखण्ड अंतर्गत द्वारी ग्राम पंचायत में द्वारी खुर्द और ररा गांव के बीच पडऩे वाले हनुमान टोला में लगभग डेढ़ दर्जन दलित परिवार रहते हैं. इन्हीं में से एक भूरा चौधरी की 65 वर्षीय पत्नी कल्ली बाई की तबियत शुक्रवार को अचानक बिगडऩे लगी. जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई. जिसे देखते हुए परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल किया. लेकिन गांव की लोकेशन मिलने पर एंबुलेंस कर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए. एंबुलेंस कर्मियों का कहना था कि 500 मीटर का रास्ता न सिर्फ कच्चा है बल्कि खेतों से गुजरता है.
बारिश होने के कारण एंबुलेंस कीचड़ भरे रास्ते में ही फंस जाएगी. जिसे देखते हुए परिजनों ने स्थानीय स्तर पर पंचायत और स्वास्थ्य अमले संपर्क साधते हुए फरियाद की. लेकिन कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से होकर एंबुलेंस के नहीं पहुंच पाने की दुहाई देते हुए सभी ने हाथ खड़े कर दिए. जिसके चलते शुक्रवार की रात किसी भी तरह की चिकित्सकीय सहायता हनुमान टोला निवासी कल्ली बाई तक नहीं पहुंच सकी.
नतीजतन उनकी तबियत और बिगड़ती चली गई. जिसे देखते हुए परिजनों ने शनिवार की सुबह एक बार फिर से प्रयास करना शुरु किया. लेकिन जब इस बात की पूरी तरह तस्दीक हो गई कि उनके गांव में न तो एंबुलेंस पहुंच सकती है और न ही कोई चिकित्सकीय सहायता, तो फिर उन्होंने आस छोड़ दी. जिसके बाद परिजनों से हिम्मत बांधी और बीमार कल्ली बाई को खटिया पर लाद कर ले जाने लगे.
खटिया पर लाद कर कीचड़ भरे कच्चे रास्ते से परिजन गुजर ही रहे थे कि कल्ली की तबियत और बिगड़ गई. रास्ते में परिजनों की आंखों के सामने ही कल्ली बाई ने दम तोड़ दिया. जिसे देखते हुए परिजनों के बीच करुण क्रंदन शुरु हो गया. यह भयावह और अमानवीय दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं. इस तरह की घटना सामने आने पर परिजनों के चेहरे पर दुख के साथ-साथ लाचारी स्पष्ट देखी जा सकती थी. उन्हें यही मलाल खाए जा रहा है कि यदि समय रहते कल्ली बाई को उपचार मिल गया होता तो वे इस तरह अचानक छोड़ कर नहीं गई होतीं.
व्यवस्था पर तमाचा
गौरी ग्राम पंचायत के हनुमान टोला के रहवासियों का कहना है कि उन्हें आज तक पक्की सडक़ नसीब ही नहीं हुई. दशक भर पहले तत्कालीन सरपंच श्रीमती सुमित्रा गोड़ द्वारा रोजगार गारंटी के मद से कच्ची सडक़ बनवाई गई थी. तब से लेकर आज तक किसी भी जिम्मेदार ने यहां की बदहाल स्थिति पर झांकने तक की जहमत नहीं उठाई. नतीजतन आधे किमी का कच्चा रास्ता यहां के रहवासियों की नियति बन चुका है.
वैसे तो हर मौसम में गांव से बाहरी संपर्क चुनौती बना रहता है, लेकिन बारिश के मौसम में यह असंभव हो जाता है. लिहाजा बारिश के मौसम में बुजुर्ग, गर्भवती महिला अथवा अन्य किसी बीमार को खटिया पर लाद कर ले जाने के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं रहता. गौरतलब है कि द्वारी ग्राम पंचायत और हनुमान टोला मौजूदा राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यदि राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के गांव में मूलभूत सुविधाओं की यह दशा है तो फिर जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
