पटना:कांग्रेस बिहार में राहुल गांधी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। जबकि मतदाता सूची संशोधन और गरीब वोटरों का नाम काटा जाना अहम मुद्दा होगा। पार्टी ने अपने नेताओं से कहा है कि वे इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएं और चुनाव आयोग की कथित सच्चाई उजागर करें। कांग्रेस का आरोप है कि वोटर लिस्ट सुधार के नाम पर गरीब और हाशिए पर खड़े मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं, ताकि बिहार में जदयू-भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके।बिहार के नेताओं को इस पूरे मामले पर लगातार अपडेट रहने और सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। पार्टी को भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करेगा।
गौरतलब है कि मतदाता जागरूकता और चुनाव सुधारों पर काम करने वाला संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) पहले ही इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है। एडीआर ने अपनी याचिका में कहा है कि बिहार में वोटर लिस्ट के रिवीजन का फैसला चुनाव आयोग ने मनमाने ढंग से लिया है, जिससे लाखों लोगों का मतदान अधिकार छिन जाने का खतरा पैदा हो गया है।
कांग्रेस ने अपने नेताओं से कहा है कि वे एडीआर की याचिका को गंभीरता से पढ़ें और इसका इस्तेमाल जनता को जागरूक करने में करें। पार्टी मानती है कि एडीआर के हवाले से बात करने पर लोगों में इस मुद्दे को लेकर ज्यादा विश्वास और समझ पैदा होगी।कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस पूरे अभियान के केंद्र में हैं और वे खुद वोटर लिस्ट में धांधली के खिलाफ मुखर रहने का इरादा रखते हैं।
हालांकि, बिहार में राजद और कांग्रेस के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है। ऐसे में यह कहना फिलहाल मुश्किल है कि राजद और कांग्रेस इस मुद्दे को मिलकर लड़ेंगे या अलग-अलग रणनीति अपनाएंगे।बिहार में कांग्रेस का चुनाव प्रचार राहुल गांधी के चेहरे पर केंद्रित किया गया है, जबकि पार्टी वहां राजद के नेतृत्व में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ती है। इस मुद्दे ने बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और आने वाले दिनों में यह बहस और भी तेज होने की संभावना है।
