साउथ अफ्रीका के कप्तान ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ दोहराया असाधारण फैसला; टीम की जीत और सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से ऊपर रखा, क्रिकेट जगत ने की सराहना।
हैदराबाद, 8 जुलाई, 2025 (नवभारत): क्रिकेट जगत में एक ऐसे फैसले ने सुर्खियां बटोरी हैं, जहाँ व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ऊपर खेल भावना और एक दिग्गज खिलाड़ी के सम्मान को रखा गया। साउथ अफ्रीका के स्टैंड-इन कप्तान वियान मुल्डर ने सोमवार को ज़िम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में 367 रन बनाकर नाबाद रहते हुए अपनी टीम की पारी घोषित कर दी। यह फैसला इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि वे वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा के 400 रनों के टेस्ट क्रिकेट के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने से मात्र 33 रन दूर थे। मुल्डर के इस निर्णय ने उन्हें एक असाधारण खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है, जिसकी सराहना पूरे क्रिकेट जगत में हो रही है।
मुल्डर ने मैच के बाद अपने इस फैसले का कारण बताते हुए कहा, “पहली बात तो यह कि हमें लगा कि हमने पर्याप्त रन बना लिए हैं और हमें गेंदबाजी करनी थी। दूसरी बात, ब्रायन लारा एक लेजेंड हैं, सच कहूं तो। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 400 या 401 रन बनाए थे (400*), और उस कद के खिलाड़ी के लिए उस रिकॉर्ड को बनाए रखना बहुत खास है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा मौका मिला तो वे शायद फिर ऐसा ही करेंगे। मुल्डर ने यह भी बताया कि साउथ अफ्रीका के कोच शुक्रि कोनराड ने भी उन्हें यही बात कही थी कि “लेजेंड्स को बड़े स्कोर रखने दो।” मुल्डर का यह कदम दर्शाता है कि टीम के हित और खेल के महानतम खिलाड़ियों के प्रति उनका सम्मान व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं ऊपर है।
मुल्डर की ऐतिहासिक पारी, टीम का लक्ष्य और क्रिकेट की सच्ची भावना
भले ही मुल्डर ने लारा का रिकॉर्ड नहीं तोड़ा, लेकिन उन्होंने 367 रनों की अपनी यह पारी दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बना दिया है।
यह रिकॉर्ड पहले हाशिम अमला के नाम था, जिन्होंने 311 रन बनाए थे। मुल्डर की पारी ने दक्षिण अफ्रीका को ज़िम्बाब्वे के खिलाफ एक विशाल स्कोर (626/5) तक पहुंचाया, जिससे टीम को मैच जीतने की स्थिति में रखा जा सके। इस निर्णय के बाद ज़िम्बाब्वे अपनी पहली पारी में 170 रनों पर ढेर हो गई। मुल्डर का यह कार्य खेल भावना की एक अनूठी मिसाल है, जिसने यह साबित कर दिया कि कुछ चीजें रिकॉर्ड से भी बढ़कर होती हैं, और सच्ची महानता विनम्रता और सम्मान में निहित है।

