
खंडवा। दादाजी की नगरी खंडवा में भजलो दादा जी का नाम भजलो हरिहर जी का नाम चारों ओर सुनाई दे रहा है गुरू पूर्णिमा पर्व के पूर्व से ही शहर में दादाजी नाम गूंजने लग गया है। दादाजी धाम पर 10 जुलाई को मुख्य पर्व मनाया जाएगा। दादाजी दरबार में निशान चढ़ाने और दादाजी की सेवा, दर्शन के लिए सैकड़ों मील पैदल चलकर भक्तों का खंडवा पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। भज लो दादाजी का नाम,भज लो हरिहर जी का नाम की गूंज शहर में सुनाई देने लगी है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से भक्त पैदल यात्रा कर निशान लेकर दादाजी धाम पहुंच रहे हैं।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि इसी कड़ी में सोमवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों से भक्त दादाजी का जयघोष करते हुए भक्तिमय माहौल में बैंडबाजे के साथ दादाजी का स्मरण करते हुए निशान लेकर टोलिया दादा दरबार पहुंची। वहीं छिंदवाड़ा, बैतूल और पांडुरना से पैदल रथ लेकर आने वाले भक्तों का भी शुरू हो गया है। जो प्रतिदिन कई किमी की पैदल यात्रा कर रहे है। ये दीवाने दादाजी भक्त नंगे पैर हाथ में निशान ध्वज लिए मुंह में दादा नाम महीना भर पहले निकलकर गुरूपूर्णिमा पर दादाजी धाम पहुंचेंगे। भक्तों की मंगल अगवानी के लिए शहरवासी भी तैयारियों में जुट गये है। शहर में जगह-जगह भंडारों के लिए भंडारा समितियों द्वारा सक्रिय होकर तैयारियां शुरू कर दी है।
भक्तों की सुविधा के लिए जगह-जगह पांडाल भी लगाये जा रहे है,वहीं प्रशासन द्वारा भी मंदिर परिसर सहित शहर में चाक चौबंद व्यवस्था के लिए बैठक कर अधिकारियों को दायित्व सौंप दिए गए है, जिससे की श्रध्दालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़़े।
इस महोत्सव की व्यवस्था संचालन हेतु ट्रस्ट द्वारा विभिन्न समितियों का गठन किया गया है। जिसमें हजारों सेवाधारियों द्वारा 24 घंटे सेवा समर्पित की जाएगी। इस वर्ष प्रकाश व्यवस्था, प्रसाद वितरण व्यवस्था सुचारु एवं सुविधाजनक बनाई जा रही है। प्रसाद वितरण व्यवस्था खिड़कियों से सतत जारी रहेगी।
दर्शनार्थियों को पंक्तिबद्ध रूप से सतत सेवा व अभिषेक के दर्शन करवाएं जाएंगे। इस वर्ष उत्सव में वृहद रूप से प्रसादी की व्यवस्था की गई है। 10 जुलाई गुरुवार गुरु पूर्णिमा पर परंपरा के अनुसार दोनों समाधियों पर दूध दही घी शक्कर तथा गंगा, नर्मदा जल से अभिषेक स्नान होगा 121 दीप मालिकाओं से पर्व की महाआरती रात्रि 8.00 बजे होगी तथा बड़ा हवन भी किया जाएगा। लाखों की संख्या में सूखे नारियल व हवन सामग्री धुनीमाता को समर्पित किये जाएंगे।
