सारनी/पाथाखेड़ा :वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में लगातार लाल ईंट के भट्टे संचालित किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से अवैध माने जा सकते हैं। इन भट्टों के चलते न सिर्फ वन भूमि का अतिक्रमण हो रहा है, बल्कि वन्य भूमि का उत्खनन कर पर्यावरण को नुकसान भी पहुँचाया जा रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार यह गतिविधियाँ प्रशासन की आंखों के सामने हो रही हैं, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
फोटो में दिख रहा है जंगल क्षेत्र में खुलेआम ईंटों का भंडारण
इस तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि सारनी से बकुड पहुंच मार्ग के बीच व सारनी क्षेत्र के आस पास बड़ी संख्या में लाल ईंटों का स्टॉक किया गया है और कुछ स्थानों पर निर्माण सामग्री ढँकी हुई भी नजर आ रही है, जिससे भट्टे के संचालन की पुष्टि होती है।
प्रशासन की अनदेखी से बढ़ रहा मनोबल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि भू-जल स्तर और वन्यजीवों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा है। अवैध कोयला व लकड़ियों से लाल ईट भट्ठा पकाया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाना चिंता का विषय है। इस विषय की जानकारी दूरभाष पर खनिज विभाग अधिकारी को भी दी गई। उन्होंने कहा कि आपके द्वारा जानकारी दी गई उस पर उचित कार्रवाई की जाएंगी।
अवैध लाल ईट भट्टा संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनहित में स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि भूमि उत्खनन करने वाले माफिया पर कड़ी कार्रवाई की जाए व इस मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।
इनका कहना है कि
अभी मीटिंग में व्यस्त हूं मैं संबंधित अधिकारी से पूछता हूं।
एसडीएम अभिजीत सिंग शाहपुर
