अमेरिकी हेज फंड पर लगा भारतीय शेयरों में हेरफेर का आरोप; ‘पंप एंड डंप’ स्कीम से खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान, सेबी जांच के दायरे में।
मुंबई, 5 जुलाई (नवभारत): भारतीय शेयर बाजार में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक अमेरिकी हेज फंड पर शेयर मार्केट में हेरफेर (मैनिपुलेशन) का आरोप लगा है। इस कथित ‘खेल’ ने कई खुदरा निवेशकों (रिटेलर्स) का पैसा डुबो दिया है, जिससे भारतीय नियामक संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह मामला तब सामने आया जब कुछ छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में अचानक और असामान्य रूप से तेजी देखी गई, जिसके बाद वे धड़ाम से गिर गए, जिससे हजारों छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि अमेरिकी कंपनी ने भारतीय शेयर बाजार में एक सोची-समझी ‘पंप एंड डंप’ (Pump and Dump) स्कीम चलाई। इस स्कीम के तहत, पहले कुछ चुनिंदा शेयरों में बड़ी मात्रा में निवेश कर उनकी कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई गईं (‘पंप’ किया गया)। छोटे निवेशक, जो तेजी से बढ़ते शेयरों की ओर आकर्षित होते हैं, उन्होंने भी इन शेयरों में पैसा लगाना शुरू कर दिया। जब शेयर की कीमतें अपने चरम पर पहुंच गईं, तो हेज फंड ने चुपचाप अपने शेयर बेच दिए (‘डंप’ किया), जिससे शेयर की कीमतें अचानक गिर गईं और खुदरा निवेशकों का पैसा फंस गया या पूरी तरह डूब गया। यह पूरा ऑपरेशन एक संगठित तरीके से किया गया प्रतीत होता है, जिसमें बड़ी पूंजी का इस्तेमाल किया गया।
सेबी की भूमिका पर सवाल, क्या सख्त होंगे नियम?
इस घटना ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की निगरानी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी बड़ी हेरफेर कैसे हो सकती है जब बाजार नियामक को ऐसे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। खुदरा निवेशक समुदाय ने सेबी से इस मामले की गहन जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, सेबी पर बाजार नियमों को और सख्त करने और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) व एल्गोरिथम ट्रेडिंग पर अधिक नियंत्रण लगाने का दबाव बढ़ गया है। यह घटना भारतीय शेयर बाजार की अखंडता और छोटे निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए नियामक ढांचे में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

