
रीवा/चाकघाट। त्योंथर क्षेत्र के थाना जनेह के अंतर्गत ग्राम जमुनिहा में गत 10 अक्टूबर 2021 को श्रीमती सावित्री देवी आदिवासी की हुई हत्या के आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध होने पर 5 हजार रुपए अर्थदंड के साथ सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है ।
यह निर्णय अपर सत्र न्यायालय त्योंथर के विद्वान न्यायाधीश डी.आर. कुमरे द्वारा खुले न्यायालय में फैसला सुनाया गया।
मध्य प्रदेश शासन थाना जनेह की ओर से अभियोजन पक्ष से सहायक अभियोजन अधिकारी अशोक तिवारी ने पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी की। मिली जानकारी के अनुसार त्योंथर न्यायालय में दिनांक 13/12/2021.को आरोप पत्र प्रस्तुत होने पर पीड़ित पक्ष के साथ घटित घटना को न्यायालय के समक्ष सहायक अभियोजन अधिकारी अशोक तिवारी ने न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी सुनील कोल पुत्र शीतला प्रसाद कोल, विनोद कोल पुत्र शीतला प्रसाद कोल, राजेंद्र कोल पुत्र बहोरी कोल जो सभी ग्राम जमुनिया निवासी हैं उन्हें दंडित करवाया गया । घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार जमुनिहा ग्राम में रहने वाले हरिश्चंद्र आदिवासी से घर के पास ही रहने वाले सुनील कोल से पिछले साल मारपीट हुई थी जिसका प्रकरण न्यायालय में चल रहा था। इस बात को लेकर आरोपी रंजीश रखता था। गत 20 अक्टूबर 2021 की शाम लगभग 6:30 बजे सुनील कोल उर्फ बड़का हाथ में सब्बल लेकर, राजेंद्र कोल कुल्हाड़ी लेकर एवं विनोद कोल डंडा लेकर हरिश्चंद्र आदिवासी के घर पहुंचा और उन लोगों को भद्दी- भद्दी गाली देते हुए विवाद करने लगे। सामने पड़ने पर हरिश्चंद्र आदिवासी की पत्नी सावित्री देवी के सिर पर सुनील कोल ने सब्बल से वार कर दिया। राजेंद्र कोल और विनोद कोल ने भी मारपीट किया जिससे सावित्री गंभीर रूप से घायल हो गई। हो-हल्ला होने पर आसपास के लोग दौड़ के आए और बीच बचाव किया। घायल सावित्री देवी को उपचार के लिए त्योंथर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया।जहां उसे मृतक घोषित कर दिया गया। घटना के पश्चात सावित्री देवी के पति हरिश्चंद्र द्वारा थाना जनेह में घटना की सूचना दी गई। थाना जनेह में प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए अपराध क्रमांक 194 / 2021 धारा 294, 451, 302 /34 भारतीय दंड विधान के तहत प्रकरण कायम करके विवेचना प्रारंभ की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध अपार सत्र न्यायालय त्योंथर में चालान प्रस्तुत किया। त्योंथर न्यायालय में सहायक अभियोजन अधिकारी अशोक तिवारी ने पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने हेतु पैरवी की। न्यायालय में 14 गवाह उपस्थित हुए। विद्वान न्यायाधीश डी.आर. कुमरे ने आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध होने पर होने पर सुनील कोल पुत्र शीतला प्रसाद, विनोद कोल पुत्र शीतला प्रसाद एवं राजन कोल को दोषी पाते हुए उनके विरुद्ध आजीवन सश्रृम करवास से तथा पांच हजार रुपए अर्थदंड से आरोपियों को दंडित किया।
