कोलकाता, 04 जुलाई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर व्यापारियों एवं अन्य लोगों से वसूली करने के कथित मास्टरमाइंड एस के जिन्नार अली को गिरफ्तार किया है।
ईडी ने हाल ही में कोलकाता और बर्दवान में छापेमारी के बाद यह गिरफ्तारी की है। बुधवार को कोर्ट में पेशी के बाद अली और उसके कुछ साथियों को 16 जुलाई तक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी खुद को ईडी का अधिकारी बताकर व्यापारियों से जबरन वसूली करने की आपराधिक साजिश में शामिल था।
ईडी ने कहा, “ वह खास कारोबारियों की पहचान कर उन्हें जबरन वसूली के लिए निशाना बनाता था। ऐसे कारोबारियों से फोन पर संपर्क किया जाता था। आरोपी ने व्यापारियों को बिधाननगर स्थित पुलिस आयुक्तालय में आधिकारिक जांच के सिलसिले में उपस्थित होने के लिए भी बुलाया जबकि वास्तव में ऐसी कोई जांच नहीं हुई थी। ”
ईडी ने कहा कि एक समय आरोपी जिन्नार अली ने एक व्यवसायी को कुल 1.30 करोड़ रुपये नकद देने और 20 लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में जमा करने के लिए भी मजबूर किया।
आरोपी जिन्नार अली ने अन्य पीड़ितों के साथ भी धोखाधड़ी की और उनके खिलाफ चल रही जांच में मदद करने का झूठा आश्वासन दिया। एक ऐसे ही मामले में उसने पीड़ित से 1.5 करोड़ रुपये की मांग की।
ईडी की तलाशी में जिन्नार अली और उनकी पत्नी के मालिकाना हक वाले दो वाहन, होंडा अमेज़ और हुंडई ऑरा वाहन जब्त किये गये।
आरोपी दंपत्ति के नाम तथा कंपनी मेसर्स स्पार्कलिंक मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के नाम के बैंक खातों में पड़ी 45.89 लाख रुपये की राशि पर भी रोक लगा दी गयी है।
ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, वस्तुयें और डिजिटल साक्ष्य जब्त किये गये। जब्त की गयी सामग्रियों में प्रवर्तन निदेशालय और अन्य सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी किये गये जाली पत्र शामिल हैं, जिन पर जाली मुहरें लगी हैं और फर्जी हस्ताक्षर हैं।
इसके अलावा, अली के आवास से भारत सरकार लिखे हुये कई पट्टे बरामद किये गये।
डॉ. एस.के. जिन्नार अली के नाम से केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक लेटरहेड भी जब्त किया गया है, जिस पर अशोक चिह्न अंकित है। जांच में यह भी पता चला है कि जिन्नार अली खुद को एक संगठन का अध्यक्ष बताया करता था।
