सीहोर. कलयुगी पुत्र ने अपने पिता की मृत्यु के बाद मां को घर से निकाल दिया. लेकिन प्रशासन ने पहल करते हुए बुजुर्ग महिला को न्याय दिलाया.
दीक्षित कॉलोनी निवासी बुजुर्ग श्रीमती सावित्री बाई विश्वकर्मा जिनका जीवन अपने पति की मृत्यु के बाद बिल्कुल अकेला हो गया था. उनका एकमात्र सहारा बेटा घनश्याम ही था. पर वक्त ने करवट बदली और वही बेटा एक दिन अपनी मां को उनके ही मकान से बाहर कर गया. घर में ताला लगाकर चाबी अपने पास रख ली और बुजुर्ग मां को दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया. न कोई आय का स्रोत, न कोई सहारा और बीमारी ने श्रीमती सावित्री बाई को कमजोर बना दिया था. वे अपने अधिकार और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एसडीएम कोर्ट पहुंची और एसडीएम तन्मय वर्मा से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत न्याय दिलाने की गुहार लगाई. एसडीएम तन्मय वर्मा ने उनकी पीड़ा को सुना, समझा और मामला दर्ज किया गया. बेटे को नोटिस देकर कोर्ट में बुलवाया गया. अंतत: मां को उनका हक वापस दिलाया गया. एसडीएम द्वारा बेटे से मकान की चाबी दिलवाई गई. बीस हजार रुपए की राशि दिलाई गई और जीवन यापन के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराई. इसके साथ ही भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत बेटे को एक हजार रुपए प्रतिमाह मां को देने का आदेश दिया.
