कलेक्टर ज्ञापन लेने नहीं आए तो बरसे वकील, हनुमान चौराहे पर कर दिया चक्काजाम

गुना। जिला न्यायालय को हनुमान चौराहे से हटाकर शहर के औद्योगिक क्षेत्र जगनपुर (हड्डीमिल) स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया के विरोध में बुधवार को अधिवक्ताओं ने अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर में वकीलों का हुजूम कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा हुआ, लेकिन जैसे ही ज्ञापन लेने कलेक्टर किशोर कन्याल नहीं आए, तो वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। पहले तो वकीलों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन को समय सीमा दी और कलेक्टोरेट में सभा की। लेकिन तय समय निकलने के बाद भी जब कलेक्टर ज्ञापन लेने नहीं आए तो वकीलों ने हनुमान चौराहे की ओर कूच किया और वहां पहुंचकर चक्काजाम कर दिया। बारिश के बावजूद वकील देर शाम तक हनुमान चौराहे पर डटे रहे। उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकडक़र मानव श्रृंखला बनाई और चौराहे को पूरी तरह जाम कर दिया। आधे घंटे से ज्यादा समय तक चला यह चक्काजाम शहर के प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक की रफ्तार थाम गया। चारों ओर गाडिय़ों की कतारें लग गईं और आमजन को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन्हें पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया। लेकिन वकील नहीं माने। मौके पर वकीलों को समझाने और ज्ञापन लेने एडीएम अखिलेश जैन पहुंचे। लेकिन उन्हें भी वकीलों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इस दौरान वकीलों ने उन्हें वापस लौटा दिया।

वकीलों ने इस प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी घेरा। उनका कहना था कि सिंधिया न्यायालय परिसर से भू-माफिया को दूर रखें। वकीलों ने कहा कि जगनपुर का इलाका पूरी तरह असुरक्षित है और वहां न्यायालय जैसी संवेदनशील संस्था का स्थानांतरण केवल जमीन की कीमतें बढ़ाने और भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की मंशा से किया जा रहा है। इसके पूर्व वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में भी जोरदार प्रदर्शन कर नारेबाजी की । वकीलों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में विस्तार से बताया कि वर्तमान न्यायालय परिसर हनुमान चौराहे पर शहर के केंद्र में स्थित है, जहां पहले से करीब 5 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। इसमें उद्योग विभाग, टीएनसीपी कार्यालय और पुराना कलेक्ट्रेट भवन की जमीन शामिल है। ऐसे में अदालत को स्थानांतरित करने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिन भू-माफियाओं ने जगनपुर क्षेत्र में सैकड़ों बीघा भूमि पहले ही खरीद रखी है, वे अब न्यायालय के स्थानांतरण के बहाने उस क्षेत्र की भूमि की कीमतें बढ़ाने की फिराक में हैं। कुछ कॉलोनाइजरों द्वारा पहले भी अवैध सडक़ निर्माण की मंजूरी ली गई है, जिससे संदेह होता है कि यह पूरी प्रक्रिया पूर्व नियोजित है। वकीलों ने कहा कि नए स्थान पर महिला अधिवक्ताओं, पक्षकारों और जजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा, क्योंकि वह क्षेत्र आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात है। पुल पार कर जाना और औद्योगिक क्षेत्र से गुजरना आमजन के लिए जोखिम भरा रहेगा। वकीलों ने यह भी कहा कि यह केवल एक न्यायिक भवन का मसला नहीं है, बल्कि यह जनता की न्याय तक पहुंच, उसकी सुविधा और सुरक्षा का मामला है। यदि सरकार ने उनकी बात नहीं मानी तो वकील जिलेभर में व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे और आमजन को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

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