
उज्जैन। भरतपुरी स्थित विकास प्राधिकरण में उसे वक्त हडक़ंप मच गया ,जब अधिकारियों को पता चला कि कोई किसान बाले बाले शहनाई गार्डन को बेचने के लिए रजिस्ट्री कराने पहुंच गया है, स्लॉट भी बुक हो गया था उपपंजीयक प्रज्ञा शर्मा ने तत्काल सतर्कता बरती और फर्जीवाड़ा पकड़ा।
नवभारत से चर्चा में विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि हमें भी पता चला है कि विकास प्राधिकरण के आधिपत्य वाले शहनाई गार्डन की कोई व्यक्ति रजिस्ट्री करने के लिए पहुंच गया, जबकि शहनाई गार्डन हमने पहले से ही लीज पर दे रखा है अभी मेरे पास शिकायत पहुंची है जिसका अध्ययन हम कर रहे हैं। शुक्रवार को पंजीयन कार्यालय पर रजिस्ट्री करने का दौर चल रहा था, तभी एक किसान एक ग्राहक और दो वकीलों के साथ में पहुंचा और दस्तावेज प्रस्तुत किए। उपपंजीयक से चर्चा की और कहा कि आप हमारी रजिस्ट्री कर दीजिए। इस पर उपपंजीयक प्रज्ञा शर्मा का माथा ठनका तो उन्होंने विकास प्राधिकरण की एनओसी मांगी। जिसे किसान और वकीलों ने देने में असमर्थता जताई तभी यह फर्जीवाड़ का मामला पकड़ में आया। मध्य प्रदेश सरकार ने बहुत अच्छा नियम निकाला है कि आप यदि अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री कराते हैं तो अगले ही दिन में नामांतरण भी करा लेवे। कहीं ना कहीं विकास प्राधिकरण ने पुराना मामला होने के चलते नामांतरण नहीं कराया है। यही कारण है कि किसान ने ताजा खसरा निकाला और उस पर चूंकि नामांतरण नहीं होने की दशा में किसान का ही नाम था, ऐसे में उक्त दस्तावेज लेकर किसान खरीददार को लेकर रजिस्ट्री करने के लिए पहुंच गया ,जबकि उक्त शहनाई गार्डन की जमीन वर्षों पहले विकास प्राधिकरण को मिल चुकी है।
