नगरनार (बस्तर), 28 जून (वार्ता)। लौह अयस्क का उत्पादन करने वाले केंद्रीय सरकारी उपक्रम एनएमडीसी की अनुषंगी कंपनी एनएमडीसी स्टील लिमिटेड का छत्तीसगढ में स्थापित नया स्टील प्लांट परिचालन शुरू करने के दो साल के अंदर नए रिकॉर्ड बना रहा है। इसके अधिकारियों का कहना है कि यह प्लांट इस साल के अंत तक अपनी स्थापित उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करते हुए परिचालन लाभ की स्थिति में आ जाएगा।
उड़ीसा की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में नगरनार स्टील प्लांट नाम से चर्चित एनएमडीसी स्टील लिमिटेड का यह एकीकृत स्टील प्लांट भारत का सबसे अत्याधुनिक इस्पात कारखाना है। भूमि अधिग्रहण में विवाद और विलम्ब , निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की मौसमी कमी, कोविड-19 महामारी और लॉजिस्टिक्स की बढ़ाओ के कारण समय और लागत वृद्धि की चुनौतियों से उबर कर अगस्त 2023 से उत्पादन कार्य करने लगा है।
एनएमडीसी स्टील लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं नगरनार स्टील प्लांट के प्रभारी एमएनवीएस प्रभाकर ने कारखाने का भ्रमण करने आए पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा ,” हमारा उत्पादन अब रफ्तार पर है, हमें यकीन है कि हम चालू वित्त वर्ष की दूसरी या तीसरी तिमाही के अंत तक अपनी स्थापित क्षमता के साथ उत्पादन शुरू कर देंगे। हम इस साल के अंत तक परिचालन लाभ की स्थिति में आ जाएंगे।”
उन्होंने कहा,”केंद्रीय इस्पात मंत्रालय, एनएमडीसी के निदेशक मंडल और छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से हम तमाम चुनौतियां से उबर कर अपनी ऐसी जगह आ गए हैं जब हमारा ध्यान उत्पादन बढ़ाने और लागत को केंद्रित है।”
इस कारखाने की स्थापित क्षमता वार्षिक 30 लाख टन हॉट रोल्ड स्टील उत्पादन करने की है।
श्री प्रभाकर ने बताया कि इसी माह 22 तारीख को कंपनी ने 11,101 टन हॉट मेटल (पिघला लोहा) का उत्पादन किया जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा ,” 22 जून को हमने अपनी ब्लास्ट फर्नेस (भट्ठी) की क्षमता के 117 प्रतिशत के बराबर हॉट मेटल तैयार करने का रिकॉर्ड बनाया बनाया है। हमें विश्वास है कि हम आने वाले समय में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में क्षमता के उपयोग और लागत में किफायत का एक नया मानक बनाएंगे।”
उन्होंने कहा ,” नगरनार इस्पात कारखाने की प्रणालियां अत्याधुनिक हैं और देश में पहली बार सरकार सरकारी क्षेत्र में इतने उन्नत कारखाने का परिचालन शुरू हुआ है। हम सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं और हमारी उत्पादन प्रक्रिया अच्छी तरह रवां हो रही है।”
उन्होंने कहा कि यह प्लांट आगे चलकर वाहन उद्योग में इस्तेमाल करने लायक इस्पात भी तैयार कर सकता है। यह देश के कुछ गिने चुने प्लांट में होगा जो ऑटो ग्रेड स्टील बना रहे होंगे।
श्री प्रभाकर ने बताया कि प्लांट परिचालन के दौरान 79 प्रतिशत का ब्लास्ट फर्नेस कोक यील्ड हासिल कर चुका है। कोक यील्ड बेहतर होने से धातु बनाने की लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी। इसका मतलब है कि लोहा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोक की बर्बादी कम हुई। उन्होंने बताया कि प्लांट ने 22 जून को एक शिफ्ट में अब तक का सबसे ज़्यादा 3,759 टन हॉट मेटल का उत्पादन किया है। इससे पहले 14 अप्रैल, को 3,729 टन का रिकॉर्ड बना था। उस दिन साइलो तक 10,000 टन से ज़्यादा ईंधन पहुंचाया गया और इसी तरह सिंटर यूनिट से ब्लास्ट फर्नेस 18,203 टन अर्ध प्रसंस्कृत माल भेजा गया जो प्लांट का अब तक का एक रिकॉर्ड है। सिंटर यूनिट में लौह अयस्क, कोक, चूना पत्थर, डोलोमाइट आदि के मिश्रण को उच्च तापमान पकाया जाता है। विंटर में पके उस माल को स्वचालित तरीके से ब्लास्ट फर्नेस में भेज कर उससे तरल लोहा तैयार किया जाता है। तरल हॉट मेटल से ही स्टील स्लेब और हाट कायल तैयार किया जाता है।
