राज्य में मनरेगा फंड के दुरुपयोग को लेकर गरमाई सियासत; पुलिस ने जांच के बाद की त्वरित कार्रवाई, कई जिलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका।
अहमदाबाद, 28 जून (नवभारत): गुजरात में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत आवंटित करोड़ों रुपये के फंड में कथित हेराफेरी और अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस बहुचर्चित घोटाले में अब कांग्रेस के एक ‘बड़े नेता’ का नाम सामने आया है, जिससे राज्य की सियासत और गरमा गई है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला मनरेगा के तहत मजदूरों को दिए जाने वाले भुगतान, सामग्री खरीद और परियोजना कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े से जुड़ा है। प्राथमिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि करोड़ों रुपये के फंड का दुरुपयोग किया गया है, और यह पैसा उन परियोजनाओं या व्यक्तियों के नाम पर निकाला गया, जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं था। गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसियों को इस घोटाले में कई और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का संदेह है, जिनमें कुछ सरकारी अधिकारी और राजनेता भी शामिल हो सकते हैं। इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और फंड के उपयोग में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विपक्षी दल ने सरकार पर साधा निशाना, निष्पक्ष जांच की मांग; भाजपा ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
इस घोटाले को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने जहां राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि यह विपक्षी दल के नेताओं की संलिप्तता का परिणाम है, जो दर्शाता है कि उनका ध्यान केवल भ्रष्टाचार पर रहा है।
इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न जिलों से मनरेगा फंड के दुरुपयोग की अन्य शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं ताकि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके और भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके। यह घटना राज्य में ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रबंधन और निगरानी तंत्र में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर देती है।

