क्रिकेटर रिंकू सिंह पर योगी सरकार की ‘मेहरबानी’ के मायने: क्या अखिलेश के ‘PDA’ फॉर्मूले का बीजेपी का जवाब है यह कदम?

अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नीति के तहत BSA पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव; आर्थिक तंगी से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर बना प्रेरणास्रोत, सियासी नफा-नुकसान पर बहस तेज।

लखनऊ, 27 जून (नवभारत): भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद, राज्य की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। यूं तो यह नियुक्ति ‘अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली 2022’ के तहत की जा रही है, लेकिन विपक्षी दल इसे समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जवाब के तौर पर देख रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर योगी सरकार रिंकू सिंह पर इतनी मेहरबान क्यों है, और इसके पीछे राजनीतिक मायने क्या हैं?

रिंकू सिंह का जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है। अलीगढ़ के एक साधारण परिवार से आने वाले रिंकू के पिता गैस एजेंसी में सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे और रिंकू ने भी बचपन में इस काम में हाथ बंटाया। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने क्रिकेट में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उनकी यह कहानी उत्तर प्रदेश के बड़े मध्यम वर्ग और निचले तबके के लिए प्रेरणादायक है। अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी लगातार यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि भाजपा ‘PDA’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करती है। रिंकू सिंह अति पिछड़े या दलित परिवार से आते हैं, ऐसे में उनकी नियुक्ति को इस समुदाय के बीच सरकार की स्वीकार्यता बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है। यह एक सीधा संदेश हो सकता है कि योगी सरकार खिलाड़ियों का सम्मान करती है, चाहे वे किसी भी पृष्ठभूमि से आते हों।

खेल नीति का सम्मान या चुनावी बिसात? रिंकू की सगाई और सियासी समीकरण

योगी सरकार ने रिंकू सिंह के अलावा पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल, पैरा एथलीट अजीत सिंह, पैरा एथलीट सिमरन, पैरा एथलीट प्रीति पाल और एथलीट किरन बालियान सहित सात अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी पदों से नवाजा है। सरकार का तर्क है कि यह उनकी खेल नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानपूर्वक शासकीय सेवाओं में स्थान दिया जा रहा है। इस कदम से खेल के साथ-साथ खिलाड़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित करने का संदेश दिया जा रहा है।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल खेल नीति का हिस्सा नहीं मान रहे। उनका कहना है कि रिंकू सिंह की हाल ही में समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज से हुई सगाई ने इस नियुक्ति को और भी अधिक सियासी रंग दे दिया है। प्रिया सरोज एक दलित नेता हैं और उनकी सगाई ने राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा बटोरी है। ऐसे में, रिंकू सिंह जैसे युवा और लोकप्रिय खिलाड़ी को सरकारी पद देकर भाजपा सपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों, विशेषकर दलित और पिछड़े वर्ग में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर सकती है। यह नियुक्ति केवल एक खिलाड़ी को सम्मान देना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक बिसात पर एक सोची-समझी चाल भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य अखिलेश यादव के ‘PDA’ कार्ड का जवाब देना है।


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