
*कांग्रेस ने अपनी सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा- सरोज पांडे*
ग्वालियर। उस समय की बात है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पद से हटाने का निर्णय हुआ, इलाहाबाद कोर्ट के एक न्यायाधीश ने उनके भ्रष्टाचार आचरण के कारण जो फैसला दिया था, जो चुनाव में उन्होंने आचरण किया था। और लगा कि वे अब पद पर नहीं रह सकती थी और बिना पद के बारे में सोच भी नहीं सकते थीं, उस समय कांग्रेस की तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया। उक्त बात भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे ने बुधवार को आईआईटीटीएम सभागार में भाजपा द्वारा आयोजित आपातकाल दिवस पर सेमिनार को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी गोपाल दंडोतिया, वरिष्ठ भाजपा नेता राज चड्डा ने भी संबोधित किया।
सुश्री सरोज पांडे ने कहा कि उस समय पूरे देश में जेल आंदोलन चल रहा था और जेल आंदोलन इतनी मजबूती से चल रहा था उस जेल आंदोलन का जॉर्ज फर्डांनिस नेतृत्व कर रह थे, गुजरात में इसी विषय को लेकर राष्टपति शासन लागू किया गया, तो आपातकाल 25 जून 1975 को लागू हुआ था, लेकिन 1974 से इसकी प्रारंभिक शुरूआत गुजरात से हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि आज मैंने सुना है कि बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा को लगाने को लेकर कांग्रेस धरने पर बैठी है तो मैं उन सभी कांग्रेसी नेताओं से कहना चाहती हूं कि जब कांग्रेसी कहां गए थे जब बाबा साहब कोे चुनाव में हराने के लिए काम किया था। उन्हें हर जगह अपमानित किया था, जबकि भाजपा ने बार बार उनका मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद बाबा साहब का विशाल स्मारक बनाया गया। अगर बाबा साहब का किसी ने सम्मान किया है तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है।
अनुभव वक्ता के रूप में पूर्व सूचना आयुक्त गोपाल दंडोतिया ने कहा कि 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा आघात था। यह केवल एक संवैधानिक प्रावधान का दुरुपयोग नहीं था, बल्कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को कुचलने का संगठित प्रयास था।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आपातकाल के समय जिन लोगों ने अपने आप को जेल में डालकर या उसे समय संविधान को बचाने का काम किया गया है वह वंदनीय है, प्रशंसनीय है आज उनकी वजह से, उनकी मेहनत एवं तपस्या के कारण ही हम सत्ता में हैं। और मैं दिल से उन संविधान सैनानियों का आभार व्यक्त करता हूं।
*इनका हुआ सम्मान*: राज चड्ढा, वैद्य गजेन्द्र गडकर, सुखपाल शाक्य, गुलशन गोगिया, विष्णु भगवान शर्मा, हरनारायण शाक्य, गोपाल भदौरिया और पूर्व सूचना आयुक्त गोपाल दंडोतिया ।
