
नयी दिल्ली, 23 जून (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकश नड्डा ने देश की एकता एवं अखंडता के अग्रदूत डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 72वें बलिदान दिवस के अवसर पर आज पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री नड्डा ने इस अवसर पर अपनी ओर से एवं पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की तथा देश के लिए डॉ मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए जम्मू-कश्मीर पर लागू धारा 370 एवं 35ए का विरोध करते हुए बलिदान दिया। श्रीनगर जेल में उनका रहस्यमय ढंग से निधन हो गया। उनकी माताजी ने भी उनकी मौत की जांच की मांग की थी, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने नजरअंदाज कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी गई।
श्री नड्डा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आज देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म बंगाल में हुआ था। देश की आज़ादी और वर्तमान भारत के स्वरूप में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। आज जो पश्चिम बंगाल, पंजाब और असम भारत का अभिन्न हिस्सा है, उसमें डॉ मुखर्जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वह बहुआयामी प्रतिभा के धनी एवं महान विद्वान थे और मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए। तत्पश्चात डॉ मुखर्जी विधानसभा में पहुंचे। स्वतंत्रता के पश्चात वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट में मंत्री बने। लेकिन, वैचारिक मतभेदों और पंडित नेहरू की तुष्टिकरण की नीति के कारण डॉ मुखर्जी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनसंघ की स्थापना की। वह जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनसंघ की स्थापना के बाद, डॉ मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे का विरोध किया। उन्होंने “एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे” का नारा दिया और इस मुद्दे पर एक आंदोलन शुरू किया। उस समय जम्मू-कश्मीर में प्रवेश के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती थी, लेकिन डॉ मुखर्जी ने उस परमिट को अस्वीकार करते हुए 11 मई को जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्थान किया। उन्हें बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया गया और श्रीनगर के जेल में रखा गया। 23 जून 1953 को श्रीनगर के जेल में, ठीक आज से 72 वर्ष पूर्व, उनका रहस्यमय ढंग से निधन हो गया। यह मृत्यु आज भी संदेह के घेरे में है। उस समय भारतीय जनसंघ एक छोटा सा संगठन था, लेकिन तब भी इस घटना पर आवाज़ उठाई गई और विपक्ष की ओर से इसकी जाँच की मांग की गई थी।
श्री नड्डा ने कहा कि डॉ मुखर्जी की माताजी ने भी तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू को पत्र लिखकर इस घटना की जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। इसके बाद भारतीय जन संघ ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। “एक देश में दो निशान, दो विधान, दो प्रधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे” के नारे के साथ कभी एकता यात्रा निकाली गई तो कभी जनादेश यात्रा निकाली गई और धारा 370 के विरोध में लगातार आवाज़ उठाई गई। भाजपा का हर कार्यकर्ता इस बात से गौरव महसूस करता है कि 6 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति तथा गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति ने संसद में धारा 370 को समाप्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाकर डॉ मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी गई।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज हम सभी यह संकल्प लेते हैं कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की रहस्यमय मृत्यु जैसी घटनाएं फिर कभी न हों। भाजपा और देश प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में इतना सशक्त बने कि लोकतंत्र और उसकी आवाज़ हमेशा मजबूत बनी रहे। हम सभी इस उद्देश्य के प्रति समर्पित हैं, और भाजपा के लाखों कार्यकर्ता डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुण्य स्मरण करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।
