माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक भर्ती मामले में जवाब तलब, राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक भर्ती नियम 2024 में सम्मिलित नियम 12.4 को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य शासन व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये।

कटनी निवासी दिनेश गर्ग एवं अन्य की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नियम 12.4 न केवल मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती नियम, 2018 के प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता और समान अवसर के अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। इस नियम के अनुसार ऐसे अभ्यर्थी, जिनके द्वारा पात्रता परीक्षा में 90 से कम अंक प्राप्त कर आरक्षित प्रवर्ग में अर्हता अर्जित की है, उनकी अभ्यर्थिता चयन परीक्षा के लिए आरक्षित प्रवर्ग में ही मान्य होगी। ऐसे अभ्यर्थी अनारक्षित प्रवर्ग में चयन हेतु पात्र नहीं होंगे। इस नियम के चलते, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के वे अभ्यर्थी जिन्होंने पात्रता परीक्षा में 90 से कम अंक प्राप्त कर अर्हता प्राप्त की है, उन्हें जनरल कैटेगरी में चयन का अवसर नहीं दिया जा रहा, चाहे वे चयन परीक्षा में सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक क्यों न प्राप्त करें। कोर्ट को बताया गया कि यह नियम सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत के विपरीत है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि आरक्षित वर्ग के मेरिट बेस्ड अभ्यर्थी यदि अनारक्षित श्रेणी की मेरिट में आते हैं, तो उन्हें यूआर कोटे में समायोजित किया जाना चाहिये। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

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