जिनवाणी का एक पन्ना फाड़ना मंदिर तोड़ने जैसा पाप

भोपाल। पद्मनाभ नगर में सहस्रकूट विज्ञातीर्थ प्रणेत्री श्रमणी गणिनी आर्यिका गुरु मां विज्ञाश्री माताजी ससंघ का मंगल आगमन हुआ। माताजी के मुखारविंद से अभिषेक व शांतिधारा विधिवत संपन्न की गई। तत्पश्चात अपने मंगल उद्बोधन में माताजी ने कहा कि आज व्यक्ति परिवार, पदार्थ और प्रतिष्ठा की रक्षा तो करता है, परंतु परमात्मा, उनकी वाणी और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु की रक्षा का दायित्व कोई नहीं उठाता। हमें पूर्वाचार्यों की दी अनमोल धरोहर और तीर्थंकर भगवान की वाणी को सुरक्षित रखने का संकल्प लेना चाहिए। माताजी ने कहा कि जिनवाणी का एक पन्ना फाड़ना मंदिर तोड़ने जैसा पाप है, जबकि उसे सुधारना मंदिर निर्माण का पुण्य दिलाता है। इस अवसर पर अध्यक्ष पी.सी. सेठी, एडवोकेट कल्पना गोहिल, पुष्पेंद्र जैन, अनिल जैन, डॉ. मनोज जैन, विमल मोदी, महिला मंडल व अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि 19 जून को अहिंसा विहार हेतु संघ का पदविहार होगा और आहार चर्या संपन्न की जाएगी।

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