
ग्वालियर। शहर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल सिद्धपीठ गंगा दास की बड़ी शाला में भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम में बलिदान हुए संतों की पुण्य स्मृति में पिछले सात दिनों से आयोजित श्रीमद भागवत कथा का संत समागम और भंडारे के साथ बुधवार को समापन हो गया। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा में हुतात्मा संतों और स्वाधीनता संग्राम की अमर सेनानी रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
गंगा दास की बड़ी शाला में संतों और रानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में संत जनों एवं महंतों का आगमन हुआ । कार्यक्रम में महन्त स्वामी रामसेवक दास महाराज ने सभी हुतात्मा संतों को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम महारानी लक्ष्मीबाई ने शुरू किया था जिसमें गंगा दास जी की बड़ी शाला के 745 अपने प्राणों का बलिदान दिया। संत महंतों ने मांग की है कि 1857 के हुतात्मा संतों का नाम देश के इतिहास में दर्ज किया जाए। कार्यक्रम में निर्मोही अखाड़े के राष्टीय अध्यक्ष 1008 मदन मोहन दास महाराज (वृन्दावन ) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
