परिवार नियोजन को लेकर विकल्प की पहल, ग्रामीण क्षेत्र में सखी हेल्पलाइन

ग्वालियर : शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण इलाके में भी अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होना शुरू हो गई है। यह आंकडा 6 9 से बढकर 12 9 हो गया है।आज आयोजित कार्यशाला में क्षेत्रीय निदेशक क्षेत्रीय कार्यालय स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर संभाग डा नीलम सक्सैना ने बताया कि कम उम्र में बच्चा होने पर महिला का शरीर गर्भधारण और प्रसव के लिए तैयार नहीं होता।

इसलिए पहले बच्चे के जन्म में कम से कम दो साल कि देरी करने कि सलाह नव दंपत्ति दी जाती है । दूसरे बच्चे के बीच अंतर रखना दो बच्चों के बीच कम से कम 3 वर्ष का अंतर रखने से माँ के शरीर को पुनः गर्भावस्था के लिए तैयार होने का समय मिलता है।इस अवसर पर उप निदेशक डॉ महेश चंद्र व्यास’ ने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि नवदम्पति या एक संतान वाले दंपत्तियों को सही समय पर परिवार नियोजन के महत्व के बारे में जानकारी मिले।

इसके लिए समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को मजबूत किया जा रहा है वहीं स्वास्थ्य उपकेंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अस्थाई गर्भनिरोधक , और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, समाज में संवाद और जागरूकता बढ़ाने के लिए सास-बहू सम्मेलन और ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस जैसे आयोजनों को भी किया जा रहा है।

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