फेड के नीतिगत निर्णय और भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर रहेगा असर

मुंबई, 15 जून (वार्ता) इजरायल और ईरान तनाव को लेकर निवेशकों के सुरक्षित गंतव्य का रुख करने से स्थानीय स्तर पर हुई भारी बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह एक प्रतिशत से अधिक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार पर अगले सप्ताह अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व के नीतिगत निर्णय और मध्य-पश्चिम के भू-राजनीतिक तनाव का असर रहेगा।

बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1070.39 अंक अर्थात 1.3 प्रतिशत का गोता लगाकर सप्ताहांत पर 81118.60 अंक पर आ गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 284.45 अंक अर्थात 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24718.60 अंक पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरों में कम बिकवाली हुई। इससे मिडकैप 415.23 अंक अर्थात 0.91 प्रतिशत लुढ़ककर सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस पर 45681.28 अंक और स्मॉलकैप 69.97 अंक यानी 0.13 प्रतिशत कमजोर रहकर 53370.29 अंक रह गया।

विश्लेषकों के अनुसार, इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और आखिर में बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। शुरुआत में बाजार में तेजी रही क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर बातचीत में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन, इजरायल ने ईरान की परमाणु संयंत्रों पर हमला कर दिया, जिससे दुनिया भर में तनाव बढ़ गया और बाजार की हालत बिगड़ गई। इस वजह से निवेशकों ने सोना और अमेरिकी बॉन्ड जैसी सुरक्षित चीजों में पैसा लगाना शुरू कर दिया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं, क्योंकि आपूर्ति में रुकावट की आशंका फिर से पैदा हो गई है।

स्थानीय स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई 75 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, जो अच्छी खबर है। लेकिन, अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की महंगाई फिर से देश में महंगाई बढ़ा सकती है। सेक्टर की बात करें तो ऑटो, रियल एस्टेट और बैंकिंग जैसे सेक्टरों में मुनाफा कमाया गया जबकि आईटी और फार्मा कंपनियों को रुपये की कमजोरी से फायदा हुआ।

अब निवेशकों की नजर अमेरिका के फेडरल रिजर्व की 17-18 जून को होने वाली अगली बैठक पर है। माना जा रहा है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन फेड आगे क्या कदम उठाएगा, उस पर सभी की नजर रहेगी। ऊंची कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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