कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान का विपक्षीय विरोध

विंध्य की डायरी

डॉ रवि तिवारी

कांग्रेस के युवराज जब से सक्रिय राजनीति में आए तब से प्रमुख विपक्षी दल ने उनकी गतिविधियों में इतनी पैनी नजर रखी जितनी शायद कांग्रेसजन रखते तो यह दिन न देखने पड़ते. अब जबकि पिछले दिनों लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राजधानी के प्रवास पर आए. उनकी यह यात्रा सिर्फ काग्रेस की संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित रही. इसके बावजूद भाजपा उनकी कही बातों को लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रही है.

हालांकि संगठन की मजबूती के इस प्रयास को लेकर विन्ध्य के नेता खासे उत्साहित है. उनका मानना है कि श्री गांधी ने जिस प्रकार की मंशा खुलकर व्यक्त की है. उन्हें यह बात काफी पहले कह देनी चाहिए थी. इससे चुनावों के दौरान हुआ पलायन रूक जाता. कांग्रेस जनों का कहना है कि पार्टी में कुछ प्रभावशाली नेताओं ने कब्जा कर रखा है, जिससे उत्साही और कर्मठ नेताओं को चाह कर भी संगठन में काम करने का मौका नही मिल पाया. उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद है. गुटबाजी एवं छत्रपो की राजनीति पर भी नकेल कसे जाने की एक उम्मीद जगी है.

आखिर सीएम ने क्यो याद किया दादा को?

प्रदेश के मुखिया डा0 मोहन यादव के मनगवां विधानसभा दौरे के बाद विंध्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. अपने उद्बोधन के दौरान उन्होने कद्दावर नेता स्व. श्रीनिवास तिवारी दादा को याद करना और उनके पोते विधायक सिद्धार्थ तिवारी को दी गई तरजीह को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है. राजनीतिक गलियारे में खलबली मची हुई है. दरअसल मुख्यमंत्री ने मंच से कहा पांच बार मनगवां के विधायक पं. श्रीनिवास तिवारी रहे, आज उनके नाती सिद्धार्थ हमारे साथ है.

वह आरक्षण की परिसीमाओ के कारण यहा से बाहर चले गये, मूलरूप से इनका घर यही है. इतना ही नही सिद्धार्थ की खुले मंच से सराहना करते हुए अभिनंदन के लिये तालियां बजवाई. सिद्धार्थ को दी गई तरजीह को लेकर कई मायने निकाले जा रहे है. कही न कही सीएम का स्पष्ट संदेश है परिसीमन या मनगवां सामान्य सीट हुई तो सिद्धार्थ मनगवां आ जायेगे. मनगवां की धरती में स्व. श्रीनिवास तिवारी को याद करना एक राजनीतिक शिष्टाचार है या फिर बयान के पीछे छिपा एक संदेश, इसे समझना होगा. निकट राजनीतिक भविष्य का संकेत भी माना जा रहा है.

पूर्व विधायक के पत्र की क्या है सच्चाई

प्रदेश में इस समय अफसरो का ट्रंासफर चल रहा है और ऐसे मौके पर पूर्व विधायक की वायरल हुई आरईएस की विवादित ट्रांसफर सूची पत्र ने ट्रंासफर उद्योग पर सवाल खड़े कर दिये है. जिसको लेकर विपक्ष भी हमलावर हो गया है. दरअसल चुरहट के पूर्व विधायक शारदेन्दु तिवारी द्वारा प्रभारी मंत्री को भेजी गई कथित ट्रांसफर सूची सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. हालाकि पत्र-सूची की हम पुष्टि नही करते, लेकिन जिस तरह से पत्र वायरल हुआ है उसको लेकर खलबली मची हुई है. कांग्रेस नेता वायरल सूची को लेकर सवाल खड़े कर रहे है. माना जा रहा है कि अगर वायरल सूची पर अमला किया गया तो आरईएस विभाग एक बार फिर भ्रष्टाचार का अड्डा बन जायेगा. बहरहाल वायरल पत्र को लेकर सत्ता पक्ष के नेता कुछ बोलने को तैयार नही है, सच्चाई जो भी हो. लेकिन ऐसे समय में सूची के साथ जारी हुए पत्र ने खलबली तो मचा ही दी है

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