ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापित करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया है। हर कीमत पर अंबेडकर प्रतिमा स्थापित करने के संकल्प के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भीम आर्मी एकता मिशन ने आज जहां शहर के बाहर निरावली में अंबेडकर महापंचायत की तो कांग्रेस, माकपा और सपा जैसी कई अन्य पार्टियां भी इस विवाद में कूद पड़ी हैं। 14 जून को ये संगठन ग्वालियर में ही सामाजिक न्याय सम्मेलन करने जा रहे हैं जिसमें दिग्विजय सिंह, उदित राज, पी. विल्सन जैसे बड़े नेताओं के अलावा सपा, माकपा, डीएमके सहित कई दलों के दिग्गज, जेएनयू के छात्र नेता शिरकत करेंगे।
हालांकि अंबेडकर प्रतिमा का मामला फिलहाल कोर्ट में है और कोर्ट का निर्णय या निर्देश आने तक इस संवेदनशील प्रकरण में कुछ भी कहना नियमविरुद्ध होगा लेकिन सियासी जमातों से लेकर सामाजिक संगठनों की तरफ से पक्ष विपक्ष में खूब दम भरी जा रही है। मामला दिल्ली की राजनीति को भी गरमा रहा है। इस विवाद पर कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली में ग्वालियर-चंबल के नेताओं ने बैठक कर वकीलों संग रणनीति बनाई है, ग्वालियर-चंबल रीजन के कांग्रेस नेताओं और वकीलों के सुझावों पर ही कांग्रेस द्वारा अगला कदम तय करने की बात कही जा रही है।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ग्वालियर-चंबल के प्रतिनिधि मंडल के साथ कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिले हैं। एक ओर दिल्ली, भोपाल और ग्वालियर में किसी एक सर्वसम्मत निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कवायद चल रही है, वहीं ग्वालियर में पुलिस प्रशासन के समक्ष ग्वालियर सहित पूरे अंचल में कानून व्यवस्था और अमन चैन बनाए रखने की चुनौती है। भीम आर्मी के बड़े नेता ग्वालियर में ही डेरा डाले हैं और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर के भी जल्द आने की सुगबुगाहट है।
चंबल में बुर्जुआ की जगह नौजवान बनेगी कांग्रेस
वर्षों से ग्वालियर चंबल के कांग्रेस संगठन पर वर्चस्व स्थापित कर अपनी सुविधा से संगठन को संचालित करने वाले मठाधीश नेताओं की विदाई तय है। अगले कुछ महीनों में इस अंचल में मुख्य विपक्षी दल का नया चेहरा उभर कर सामने आएगा। वजह यह कि पार्टी नेतृत्व ने साफ तौर पर क्राइटेरिया बना दिया है कि नए अध्यक्ष 45 साल से कम उम्र के ही होंगे। जाहिर है कि 35 से 45 साल की उम्र के युवा नेताओं को मौका मिलेगा।
चूंकि बदलाव की इस प्रक्रिया की निगरानी खुद प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी कर रहे हैं, लिहाजा गड़बड़ी या पक्षपात की कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं है। अन्य दलों को छोड़कर कांग्रेस के रास्ते अपना कैरियर बनाने का सपना संजोकर आए नेताओं को भी मौका मिलने की गुंजाइश कम ही है। क्योंकि पांच साल के दरम्यान दीगर दलों से कांग्रेस में आए नेताओं को पैनल में न रखे जाने का मापदंड बना है। बहरहाल, चंबल में अब बुर्जुआ की जगह नौजवान कांग्रेस का चेहरा नजर आएगा।
हजारों लोगों का धर्म परिवर्तन हो गया, हिंदुत्व के पहरेदारों को खबर नहीं
ग्वालियर को जनसंघ के जमाने से ही हिंदुत्ववादी राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है, हिंदुत्व को प्रभावित करने वाले प्रत्येक मसले पर यहां के नेताओं की बारीक नजर रहती है लेकिन शहर से सत्तर किमी दूर धाकड़ खिरिया गांव में हजारों लोगों का धर्म परिवर्तन हो गया और हिंदुत्व के पहरेदारों को कानोंकान खबर ही नहीं लगी। भितरवार के एसडीओपी अभी भी यही फरमा रहे हैं कि उन तक कोई शिकायत ही नहीं आई है लेकिन वायरल वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि तीन दिन तक चले बौद्ध धम्म सम्मेलन में किस तरह बौद्ध धर्मोपदेशकों ने हिंदू देवी देवताओं को न मानने, ब्राह्मणों से पूजन पाठ न कराने और बौद्ध धर्म के विरुद्ध कार्य न करने जैसी तमाम शपथ दिलाईं। इस सम्मेलन में 96 गांवों की भागीदारी रही। अब खबर है कि सूबे की सरकार ने संज्ञान लेकर प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है।
डरा रहा कोरोना, बचाने वाले ही संक्रमित
ग्वालियर में कोरोना जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए प्रशासन के हाथ पैर फूलने लगे हैं। चिंता इसलिए और बढ़ गई है कि ग्वालियर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेएएच पर कोरोना कहर बनकर टूटा है। यहां रोजाना ही डॉक्टर्स इस महामारी से संक्रमित हो रहे हैं। बीते रोज जो 4 नए कोरोना मरीज मिले हैं उनमें 2 जूनियर डॉक्टर और एक एमबीबीएस स्टूडेंट भी है। कुल मिलाकर मौजूदा वक्त ग्वालियर में कोरोना के डेढ़ दर्जन केस एक्टिव हैं, रफ्तार तेज है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां सुस्त हैं
