इंदौर: सोमवार को जेईई एडवांस के परिणाम घोषित किए गए. इसमें शहर के छात्र भी टॉपर सूची में जगह बनाने में कामयाब हुए. इसमें शहर के चिरायु जैन जैन ने आल इंडिया 28वीं रैंक बनाई और इंदौर सिटी टॉपर भी बने. इसके अलावा शांतनु पाटिल आलइंडिया 174वीं रैंक के साथ सिटी टॉपर में दूसरे स्थान पर रहे. अथर्व एरन 265वीं रैंक के साथ शहर में तीसरे स्थान पर रहे. वहीं लड़कियों में हर्षिता गोयल ने जेईई एडवांस 2025 में ऑल इंडिया 434वीं रैंक हासिल कर लड़कियों में कानपुर जोन की टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है. वे स्टेट टॉपर रहीं.
कंसिसटेंसी है महत्वपूर्ण
इंदौर के सिटी टॉपर चिरायु जैन की आल इंडिया रैंक 28वीं रही. इसके साथ ही वे इंदौर सिटी टॉपर रहे. चिरायु ने बताया कि मेरी जईई एडवांस पढ़ाई की जर्नी काफी एक्साटिंग रही. पहले मैंने ओलम्पियाड पर फोकस किया. इसके बाद अपनी मुख्य परीक्षा पर ध्यान दिया. मेरे माता-पिता डॉक्टर हैं. उनका मुझे पूरा सहयोग रहा. उन्हें पता था कि मुझे मैथ्य पसंद है इसलिए उन्होंने कोई प्रेशर नहीं किया. मेरे शिक्षक भी सपोर्टिव रहे, उनका पूरा मार्गदर्शन मुझे मिला.
मेरी पढ़ाई का टाईम कोई फिक्स नहीं था लेकिन रोज 7-8 घंटे पढ़ाई करता था. इस दौरान सोशल मीडिया से भी दूरी बनाकर रखी लिमिटडे इस्तेमाल किया. मेरा मैथ्य स्ट्रांग था और केमेस्ट्री कमजोर थी इसलिए उस पर ज्यादा ध्यान दिया. रैंक मेरा लक्ष्य नहीं था पूरा फोकस पढ़ाई पर ही था लेकिन पता था कि अच्छी रैंक बना लूंगा. अभी मैंने भविष्य के लिए कुछ सोचा नहीं है. फिलहाल पढ़ाई पर ही ध्यान दूंगा. दूसरे तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से यही कहूंगा कि कंसीसटेंसी महत्पूर्ण है. इसे बनाए रखें. क्लास रूप में पूरा ध्यान दें और शिक्षकों की बात सुनें.
कैमेस्ट्री पर रखा फोकस
174वीं रैंक बनाने वाल शांतनु पाटिल ने बताया कि मैंने 10वीं क्लास से ही आईआईटी के लिए तैयारी शुरू कर दी थी. प्रतिदिन 5-6 घंटे कोचिंग मैं पढ़ता था और 6 घंटे घर पर भी पढ़ता था. मेरी तैयारी इतनी थी कि मुझे लगा था कि तीन सौ के अंदर रैंक आएगी लेकिन दो सौ के अंदर आएगी यह उम्मीद नहीं थी. मेरा मैथ्य स्ट्रांग था और कैमेस्ट्री कमजोर. मुझे केमेस्ट्री में कम नंबर आते थे इसलिए उस पर फोकस किया. सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी. मैंने आगे के लिए अभी कुछ सोचा नहीं है केवल पढ़ाई पर ही फोकस करना चाहता हूं.
एनवायरमेंट आधारित स्टार्ट अपर करना है
265वीं रैक बनाने वाले अथर्व एरन ने कहा कि मेर जेईई की जर्नी उतार-चढ़ाव भरी रही. टेस्ट के दौरान कम नंबर आते थे तो डिमोटिवेट हो जाता था. मुझे टीचर और पैरेन्ट्स ने समझाया कि टेस्ट नहीं मुख्य परीक्षा महत्वपूर्ण होती है इसलिए उस पर फोकस रखो. उनका सपोर्ट और मार्गदर्शन मिलता रही. इस कारण मैंने ये रैंक बना पाया हूं. इस दौरान सोशल मीडिया से मैंने दूरी बनाए रखी. मैं आईआईटी में इलेक्टि्रक्लस के लिए अप्लाय करूंगा. भविष्य में एनवायरमेंट आधारित स्टार्ट अप शुरू करना चाहता हूं.
कड़ी मेहनत और अनुशासन से मिली सफलता
गर्ल्स स्टेट टॉपर हर्षिता गोयल ने बताया कि 11वीं कक्षा से ही जेईई की तैयारी शुरू कर दी थी और निरंतर मेहनत करती रहीं. प्रतिदिन लगभग 15 घंटे पढ़ाई करती थीं. पूरे सप्ताह सातों दिन उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता दी. पढ़ाई में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आई. अच्छे रिजल्ट की उम्मीद थी, लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि वे टॉपर बनूंगी. मेरी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और अनुशासन को जाता है. आगे चलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कंप्यूटर साइंस की फील्ड में जाना चाहती हूं और इसमें कुछ बड़ा करना चाहती हूं. पढ़ाई के साथ-साथ रीडिंग, आर्ट एंड क्राफ्ट और ट्रेवलिंग का भी शौक है. उज्जैन की रहने वाली हर्षिता की मां मेघना गोयल वहां बैंक में कार्यरत हैं. इंदौर में नानी के साथ रहकर तैयारी कर रही हैं.
