सिंगरौली: सिंगरौली ज़िले के मोरवा विस्थापन को लेकर शासकीय एवं वन भूमि पर काबिज कास्तकारों की मांगों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एनसीएल अब तक इस मामले में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका है, जिसके चलते यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है।प्रभावित लोगों का कहना है कि एनसीएल द्वारा केवल पट्टा धारकों को लाभ दिया जा रहा है, जबकि शासकीय एवं वन भूमि पर वर्षों से निवासरत लोगों को दरकिनार किया जा रहा है। इसे लेकर 5 जून को एनसीएल की जयंत और दुद्धिचुआ परियोजनाओं का उत्पादन बंद कराने की चेतावनी दी गई है।
इस बीच पुनर्स्थापना सेल के जीएम और एनसीएल के निदेशक (कार्मिक) से बातचीत में शासकीय भूमि पर बसे लोगों को भी पट्टा धारकों के समान लाभ देने की मांग की गई, जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस विषय पर कलेक्ट्रेट स्तर पर पहले ही निर्णय हो चुका है और उसके मिनिट्स भी जारी हो चुके हैं.
सिंगरौली विस्थापित संघर्ष समिति ने एनसीएल से यह सवाल किया कि पूर्व में वार्ड क्रमांक 10 मढ़ौली के विस्थापन में सभी को सामान्य लाभ किस आधार पर दिया गया था। एनसीएल अधिकारी इस पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अब संघर्ष समिति पूर्व विधायक रामलल्लू बैस के नेतृत्व में 5 जून को एनसीएल की प्रमुख परियोजनाओं का उत्पादन बंद कराने की रणनीति बना रही है।
