देश में करना चाहता था मुगल व्यवस्था की स्थापना

हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इंकार

जबलपुर। अनलॉफुल एक्टिविटी (प्रिवेंशन) एक्ट में एनआईए के द्वारा गिरफ्तार अधिवक्ता ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस देव नारायण मिश्रा की युगलपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता के पास से जब्त आपत्तिजनक सामग्री से पता चलता है कि सोसायटी के सदस्यों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव में व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे मुगल व्यवस्था की स्थापना की जा सके, जैसा कि अंग्रेजों ने मुगलों के हाथों से भारत पर कब्जा कर लिया था।

भोपाल निवासी वासीद खान के खिलाफ एनआईए ने भारतीय दंड संहिता की धारा 121-ए, 153-ए, 120-बी, 201 के साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (जिसे आगे 1967 का अधिनियम कहा जाएगा) की धारा 13 (1)(बी), 18, 18-ए, 18-बी के तहत प्रकरण दर्ज किया था। विशेष न्यायाधीश एनआईए भोपाल द्वारा 8 फरवरी 2025 को नियमित जमानत का आवेदन खारिज कर दिया था। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन अपील दायर की गयी थी।

अपीलकर्ता की तरफ से कहा गया था कि वह नामांकित अधिवक्ता है तथा मानवाधिकार संगठन के साथ स्वयंसेवक के रूप में काम करता है और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है। उसने ऐसा कोई कार्य नहीं किया है जो 1967 के अधिनियम की धारा 2 (ओ) के तहत गैरकानूनी गतिविधियों की परिभाषा के अंतर्गत आता है। अपीलकर्ता के पास से जब्ती के कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है। अपीलकर्ता जेल में निरुद्ध होने के कारण वह जब्ती स्थल में उपस्थित नहीं था। अपीलकर्ता के पास से जब्त आपत्तिजनक सामग्री से पता चलता है कि सोसायटी के सदस्यों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव में व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे मुगल व्यवस्था की स्थापना की जा सके, जैसा कि अंग्रेजों ने मुगलों के हाथों से भारत पर कब्जा कर लिया था।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अनलॉफुल एक्टिविटी (प्रिवेंशन) एक्ट, एक भारतीय कानून है जिसका उद्देश्य गैरकानूनी गतिविधियों, विशेष रूप से आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है. यह कानून भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ निर्देशित गतिविधियों से निपटने के लिए शक्तियां प्रदान करता है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रकरण लंबित है और अपीलकर्ता अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं। प्रकरण की गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी करने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आवेदन परिपक्व नहीं होने के कारण खारिज करने के योग्य है।

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