नयी दिल्ली 29 मई (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरूवार को यहां एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मसातो कांडा के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत एडीबी साझेदारी को आकार देने पर चर्चा की और दौरान एडीबी ने भारत के लिए निरंतर समर्थन की प्रतिबद्धता जताई।
वित्त मंत्रालय ने एक्स पर यह जानकारी देते हुये कहा कि चर्चा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत के सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन दृष्टिकोण के साथ प्रणालीगत परिवर्तन लाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘बजट प्लस’ और ‘वित्त प्लस’ दृष्टिकोण पर जोर दिया, साथ ही उभरती राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर प्रतिक्रिया देने में तत्परता का आग्रह किया।
वित्त मंत्री ने ‘अंत्योदय’ सिद्धांत पर प्रकाश डाला जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचे। उन्होंने एकीकृत ग्रामीण समृद्धि उपायों के लिए एडीबी से समर्थन का आग्रह किया, जिसमें रोजगार और स्थानीय उद्यमिता का सृजन और कृषि में नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि गांवों को लचीले समुदायों में बदला जा सके। विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप वित्त मंत्री ने प्रणालीगत शहरी शासन सुधार, पारगमन उन्मुख विकास, नगरपालिका वित्त को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे से आगे बढ़ने पर जोर दिया।
श्रीमती सीतारमण ने भारत की बुनियादी ढांचा वित्तपोषण जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और नीति समर्थन, जोखिम कम करने वाले तंत्र और पीपीपी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के माध्यम से निजी निवेश को सक्षम करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने के लिए एडीबी को प्रोत्साहित किया।
इस दौरान वित्त मंत्री ने विकास एजेंडे के समर्थन के वास्ते विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन के लिए भारत की अच्छी तरह से स्थापित प्रणालियों का उपयोग करने के महत्व पर जोर दिया।
श्री कांडा ने 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के भारत के विजन को समर्थन का आश्वासन दिया और एडीबी के अंतर्राष्ट्रीय अनुभव का निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं को लाने, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे, खाद्य प्रणालियों के परिवर्तन और निजी पूंजी का लाभ उठाने सहित भारत के लिए निरंतर समर्थन की प्रतिबद्धता जताई।

