
कोलंबो, 25 मई (वार्ता) श्रीलंका में लाल चावल की कमी के लिए लगाए गए आयात प्रतिबंध और मूल्य नियंत्रण के बाद अब व्यापार मंत्रालय पर नमक व्यापार में एक नई ‘माफिया’ तैयार करने के आरोप लग रहे हैं।
द्वीप राष्ट्र के एक प्रमुख समाचार पोर्टल ने यह जानकारी दी।
ईकोनॉमीनेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका की ‘चावल माफिया’ और ‘मक्का माफिया’ असल में वे व्यापारी हैं जो सरकार के करीब हैं और जिन्हें 1970 के दशक की तर्ज पर आयात लाइसेंस की आड़ में उपभोक्ताओं का शोषण करने की छूट मिली हुई है। आर्थिक भाषा में इन्हें ‘क्रोनी मर्केंटिलिस्ट’ या ‘रेंट सीकर’ कहा जाता है।
खाद्य सामग्री होने के कारण यह वह क्षेत्र है जहां सत्ताधारी नेताओं के करीब के कारोबारी आसानी से अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। ये व्यापारी पहली बार राजपक्षे शासनकाल में उभरे थे, जब राज्य की मदद से प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया था। अब यही सिस्टम मौजूदा सरकार को विरासत में मिला है।
विपक्षी सांसद रऊफ हकीम ने संसद में कहा, “अब इस देश में एक नमक माफिया तैयार हो चुकी है। क्या कोई इस माफिया को बढ़ावा दे रहा है? जनता ने सरकार को ऐसे कामों के खिलाफ ही भारी जनादेश दिया था।”
श्री हकीम ने आरोप लगाया कि एक सरकारी नमक कंपनी के निदेशक मंडल में कुछ निजी नमक व्यापारी भी शामिल थे।
उन्होंने बताया, “जो नमक का पैकेट पहले 130 रुपये का था, वह अब 360 रुपये में बिक रहा है, जबकि इसे 150 या 200 रुपये में बेचा जा सकता है। इसके बजाय एक बड़ी नमक माफिया बन गई है, जो आम जनता पर भारी बोझ डाल रही है।
