रीवा:अगले माह से मानसून दस्तक देगा और झमाझम बारिश शुरू हो जायेगी. इस बार भी बाढ़ जैसे हालात निर्मित होगे और कृतिम बाढ़ आयेगी. दरअसल शहर के बीच से निकलने वाले सभी बड़े नालो पर बेजा कब्जा है.जिसके चलते नाले की चौड़ाई सिमट गई है और रसूखदारो ने नाले पर कब्जा कर रखा है. अभी तक नगर निगम प्रशासन की नींद नही टूटी है, बड़े नालो को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ सफाई को लेकर कोई काम शुरू नही किया. जब बाढ़ जायेगी तो हाय तौबा मचेगी. उल्लेखनय है कि शहर के बरसात के समय बाढ़ की स्थित निर्मित होती है.
जल स्तर बढऩे के साथ लोगो के घरो में पानी भर जाता है. पानी निकासी न होने के कारण कृतिम बाढ़ आ जाती है. झमाझम बारिश भले न हो, हल्की सी बारिश में लोगो के घरो में पानी पहुंच जाता है. शहर से निकलने वाले छोटे-बड़े सभी नालो पर अतिक्रमण कर लिया गया है. जिस नाले की चौड़ाई 5 से 10 मीटर थी आज अतिक्रमण के चलते तीन मीटर नाला रह गया है. नाले पर दीवाल खड़ी कर ली गई है तो कही पर बाउंड्री बनाकर कब्जा किया गया है. लिहाजा बरसात का पानी नही निकल पाता और बाढ़ जैसी स्थित निर्मित हो जाती है.
शहर का सबसे मुख्य अमहिया नाला है, इसके साथ ही चंदुआ नाला, धिरमा नाला, खलगा नाला सहित कई बड़े नाले है जो अतिक्रमण की चपेट में है. नाले के दोनो तरफ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है. इसके अलावा जो नाले है उनका स्वरूप बदल दिया गया है. नगर निगम अभी सो रहा है कमिश्नर केवल बैठक में नालो की सफाई के निर्देश देते है पर मैदानी स्तर पर केवल सफाई होती है अतिक्रमण नही हटता. इस बार भी अच्छी बारिश हुई तो शहर के अंदर बाढ़ जरूर आयेगी. अभियान चलाकर नालो का अतिक्रमण हटाना चाहिये. नगर निगम आयुक्त डा0 सौरभ सोनवणे ने बताया कि बरसात के पहले सभी नालो की सफाई के निर्देश दिये गये है. जहा कही अतिक्रमण होगा, उसे भी हटाने का काम किया जायेगा. सभी छोटे-बडे नालो की सफाई की जा रही है ताकि मानसून के पहले सफाई पूरी हो जाय.
2016 में की गई थी अतिक्रमण पर कार्यवाही
वर्ष 2016 में शहर में बाढ़ आई थी जिसके चलते भारी नुकसान हुआ था. राहत और बचाव के लिये सेना का हेलीकाप्टर पहुंचा. इसके अलाव कई राहत शिविर बनाये गये थे. बाद में जब समीक्षा हुई तो पाया गया कि नालो पर किये गये अतिक्रमण के चलते बाढ़ आई है. परिणाम स्वरूप कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व, पुलिस एवं नगर निगम की संयुक्त टीम ने नापजोख की और अमहिया नाले सहित कई नालो से अतिक्रमण हटाया गया.
लेकिन उसके बाद ग्रीन जोन एवं रेड जोन पर फिर से कब्जा कर लिया गया. जबकि नगर निगम ने सीमा चिन्ह का निशान लगाया था. नाले पर किये गये अतिक्रमण के चलते एक बार फिर बाढ़ की स्थित निर्मित होगी. वर्ष 2016 के बाद किसी नाले से अतिक्रमण नही हटाया गया. बड़े नालो में मिलने वाले कई छोटे नाले है जो मोहल्ले से निकलते है उस पर भी अतिक्रमण है. कई ऐसे है नाले है जो पूरी तरह से नष्ट कर दिये गये है. नगर निगम अभी कोई कार्यवाही नालो को लेकर ही कर रहा है जो बाढ़ का कारण बनेगे.
