HC: 12 साल पुराना धोखाधड़ी का केस खारिज

इंदौर. मकान एग्रीमेंट के बाद रजिस्ट्री नहीं कराने को लेकर दर्ज 12 साल पुरानी एफआईआर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने निरस्त कर दिया. कोर्ट ने माना कि यह पूरी तरह सिविल प्रकृति का मामला है, जिसे गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया.

वर्ष 2013 में फरियादी बृजेश गुप्ता ने परदेशीपुरा थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी कि स्नेहल सबनीस और उनके भाई श्रीपद सबनीस ने उनसे मकान बेचने का एग्रीमेंट किया और एडवांस राशि ली, लेकिन बाद में रजिस्ट्री नहीं कराई. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी थी. मामला आईपीसी की धारा 420, 34 के तहत दर्ज किया था और ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी थी. आरोपियों की ओर से अधिवक्ता आलोक खरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को चुनौती दी थी, उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल एग्रीमेंट के उल्लंघन का मामला है, जो सिविल प्रक्रिया के तहत निपटाया जाना चाहिए था.

कोर्ट का निर्णय:

जस्टिस गिरीश दीक्षित की एकल पीठ ने तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि एफआईआर में उल्लिखित तथ्य सिविल विवाद के दायरे में आते हैं और इससे धोखाधड़ी का अपराध प्रथम दृष्टया साबित नहीं होता. अतः एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की लंबित कार्रवाई को निरस्त किया जाता है.

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