इंदौर: प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़े तालाब में शिकारे चलाने की योजना बनाई है. इसके तहत जुलाई में बड़े तालाब में 10 शिकारें आ रहे है, जिनमें पर्यटक सैर कर सकेंगे. शिकारे कश्मीर की डल झील में चलने वाले स्वरूप के ही होंगे. शिकारों का निर्माण भी कश्मीर से ही करवाया जा रहा है. कल सरकार की मंत्रिमंडल बैठक चल रही थी.
उसी दौरान इंदौर के पूर्व कलेक्टर और वर्तमान में प्रदेश पर्यटन विभाग के प्रमुख इलैया टी राजा पत्रकारों से रूबरू होकर चर्चा कर रहे है. राजा ने प्रदेश पर्यटन के लिए किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि भोपाल के बड़े तालाब में शिकारे चलाने की योजना मंजूरी दी गई थी. उसी के तहत भोपाल में पर्यटन विभाग द्वारा बड़े तालाब में 10 शिकारे चलाए जाएंगे.
शिकारे इंजन से नहीं बल्कि प्राकृतिक वातावरण में प्राकृतिक परंपरा के अनुसार चप्पू से ही चलाने की व्यवस्था रहेगी. राजा ने बताया कि शुरू में दिन में सैर करवाई जाएगी और फिर बाद में शिकारे रात में भी चलेंगे. योजना सफल रही तो शिकारे की संख्या बढ़ाई जाएगी. बड़े तालाब में अभी स्टीमर चलता है, लेकिन पर्यटकों को पूरी सुविधा के साथ रात रुकने की भी छूट भविष्य के प्लानिंग में है.
राजा ने कहा कि यह योजना सफल रही तो प्रदेश के प्रमुख शहरों में स्थित बड़ी झील और तालाब में शिकारें चलाने की योजना बनाई जाएगी. उन्होंने इंदौर बिलावाली तालाब का भी जिक्र किया. शहर के सिरपुर और गुलावट में रामसर साइट होने से ये गतिविधि संचालित नहीं कर सकते है, यह भी बताया.
गोपाल मंदिर की छत से महाकाल लोक देखने की व्यवस्था
राजा ने उज्जैन के गोपाल मंदिर की छत से महाकाल लोक के देखने की भी जानकारी दी. साथ ही आधुनिक व्यवस्था में मोबाइल और स्लाइड पर मंदिर की दूसरी मंजिल पर उज्जैन की जानकारी और उल्लेख भी पर्यटकों के मिलेगा। मंदिर की छत से महाकाल लोक का विहंगम दृश्य देखने का रिस्पॉन्स ही कुछ अलग होगा.
