सौर ऊर्जा में निवेश से ननि को मुनाफा, टैरिफ बढ़ोतरी का असर नहीं

भोपाल। राजधानी में 30 जुलाई तक नगर निगम के दो अन्य सौर ऊर्जा संयंत्र बिजली का उत्पादन शुरू कर देंगे, यह दोनों सयंत्र 20.5 मेगावाट तक की बिजली का उत्पादन करेंगे। पहले चरण में सौर सयंत्र ने 10 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था। यह नया लगा सौर सयंत्र हर घंटे 7 से 8 मेगावाट बिजली बना रहा है जिसका परिक्षण 14 अप्रैल को शुरू हुआ था. इसके बाद इसका उद्घाटन किया गया। एक संयंत्र पर 41 करोड़ रुपए खर्च हुआ। इसमें से निगम ने 14 करोड़ रुपए दिए। इससे निगम को सिर्फ 4.20 रुपए प्रति यूनिट बिजली मिलेगी, जबकि अभी निगम को एक यूनिट पर 6.14 रुपए खर्च करना पड़ता है। एक संयंत्र से हर साल 1 करोड़ 75 लाख यूनिट बिजली बनाने की उम्मीद है

इस समय निगम 4 प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रहा है, जिसमे 10 मेगावाट 2 और 10.5 मेगावाट 2 सयंत्र है. हर एक प्रोजेक्ट पर 41 करोड़ रुपए का खर्च किये जाएंगे। मतलब चारों प्रॉजेक्ट्स पर कुल 164 करोड़ का खर्चा आएगा इसमें नगर निगम 54 करोड़ रुपए खर्च करेगा। इससे 25 साल तक नगर निगम को सभी खर्च मिलाकर करीब 4.20 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी। इसके साथ ही पावर बैंक भी बनेगा। यानी ज्यादा बिजली बनने पर वह पावर बैंक में जमा कर सकेगा।ऐसी स्थिति में निगम को केवल 10 मेगावाट के एक संयंत्र से हर साल 3 करोड़ 39 लाख 50 हजार की बचत होगी। पूरी क्षमता यानी 41 मेगावाट उत्पादन शुरू होने पर यह बचत कम से कम 4 गुना यानी 12 करोड़ से अधिक होगी। अगले वर्षों में टैरिफ के बढऩे पर निगम पर पडऩे वाला अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ेगा।

 

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