प्रमोद व्यास
उज्जैन: शिप्रा किनारे 29 किलोमीटर घाट का निर्माण किया जाना है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसकी घोषणा एवं भूमि पूजन भी कर दिया, फिर भी यह परियोजना शुरू नहीं हो पाई है। जल संसाधन विभाग और नमामि गंगे प्रोजेक्ट के बीच जिम्मेदारी तय न होने के कारण काम अटका हुआ है, जबकि निविदा प्रक्रिया भी कई बार विफल हो चुकी है. कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की चेतावनी के बावजूद अधिकारी असमंजस में हैं, जिससे सिंहस्थ की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
इस संबंध में जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री मयंक सिंह से चर्चा की, तो उन्होंने कहा कि 29 किलोमीटर लंबे घाट का काम हमारे पास नहीं है. नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत है. उसके लिए अलग ही विंग बना दी गई है. वही इस काम को देख रहे हैं. जब नमामि गंगे प्रोजेक्ट को देख रहे शिवम दुबे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग ही इस कार्य को देख रहा है. हमारे पास इसका काम नहीं है.
सिंहस्थ में सबसे महत्वपूर्ण स्नान
सिंहस्थ महापर्व में सबसे महत्वपूर्ण धर्म कार्य स्नान को माना गया है. बाकी सब तैयारी भले हो न हो श्रद्धालुओं का स्नान मोक्षदायनी माँ शिप्रा में होना चाहिए. साधु संतों से लेकर आगंतुक अतिथि कुंभ में स्नान करने के लिए ही लाखों रुपए खर्च करके पहुंचते हैं. यदि वह व्यवस्था ही सुचारु तौर पर नहीं हो पाई तो 50 हजार करोड़ रुपए सिंहस्थ में खर्च करने का कोई औचित्य ही नहीं रहेगा.
29 किलोमीटर नए लंबे घाट
उज्जैन में सिंहस्थ से पहले शिप्रा नदी किनारे के 29 किमी नए लंबे घाट निर्मित किए जाना है. 570 करोड रुपए इसकी निर्माण लागत रखी गई है. 30 महीने में यह काम पूरा किया जाना था, बावजूद इसके अभी निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं हो पाया है.
कलेक्टर ने नाव में किया था निरीक्षण
29 किलोमीटर लंबे घाट की इस परियोजना में सिर्फ घाट ही नहीं, कई स्थानों पर बैराज, स्टाप डैम और कुछ वैकल्पिक पक्के रास्ते का भी निर्माण प्रस्तावित है. स्टाप डैम 70 से 110 मीटर लम्बा रहेगा. इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने नाव में बैठ शिप्रा के किनारों का निरीक्षण किया था.
बार-बार निकाली जा रही निविदा
पहली बार निविदा में भाग लेने वाली 7 फर्मों में से कोई भी तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरी थी. दूसरी बार आमंत्रित निविदा में 8 कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने काम करने का प्रस्ताव दिया था, जिनमें से इंदौर की फलोदी कंस्ट्रक्शन को काम दिए जाने की चर्चा तो चली, बावजूद इसके बताया जा रहा है कि अब तीसरी बार निविदा निकाली जाएगी. जबकि दिलीप बिल्डकॉन जैसी अव्वल दर्जे की कंपनी भी इसमें भाग ले रही है.
नमामि गंगे प्रोजेक्ट से बात करिए
जल संसाधन विभाग इस कार्य को नहीं देख रहा है. कान्ह क्लज डक्ट योजना हम देख रहे हैं. 29 किलोमीटर नए घाट का काम नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है, उनसे बात कीजिए.
मयंक सिंह, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन
हम नहीं जल संसाधन देख रहा है
जल संसाधन विभाग ही 29 किलोमीटर नए घाट की योजना को देख रहा है हमारे पास तो नाला टेपिंग व अन्य कार्य हैं.
शिवम दुबे, नमामि गंगे प्रोजेक्ट
