नई दिल्ली, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और सुरक्षा बलों के बीच हुई ताजा झड़पों में नौ लोगों की मौत हो गई है, जिसमें आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस और बल प्रयोग के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है, जिसके चलते मुजफ्फराबाद की ओर होने वाले मार्च के दौरान स्थिति और अधिक बिगड़ गई है।
मीरवाइज और भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर में भारी चिंता व्यक्त की गई है। मीरवाइज उमर फारूक ने मौतों पर गहरा दुख जताते हुए पाकिस्तान सरकार से बल प्रयोग बंद कर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने भी मानवीय संकट पर गंभीर चिंता जताई है। भाजपा ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों की जंग
यह अशांति तब से और बढ़ गई है जब से स्थानीय सरकार ने JAAC पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगाया है। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से स्थानीय विधानसभा में बाहरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को हटाने और खाद्य संकट के समाधान की मांग कर रहे हैं, उनका मानना है कि इन सीटों का उपयोग चुनाव प्रभावित करने के लिए किया जाता है। गिरफ्तारी और दमन के बावजूद, विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब राजधानी की ओर बढ़ने वाले हर मार्च को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।

