रीवा:रायपुर कर्चुलियान अन्तर्गत बुड़वा में पर्यावरण प्रदूषण की अनापत्ति एवं एनजीटी की अनुमति लिए बगैर खनन की अनुमति दे दी. अब प्रकृति प्रदत्त पहाड़ को खोदा जा रहा है. उक्त पहाड़ की चोटी पर मां शारदा का मंदिर है जो समूचे रायपुर कर्चुलियान ही नहीं बल्कि आसपास के अंचल के रहवासियों की आस्था का प्रतीक भी है. इसको लेकर रीवा कमिश्नर एवं कलेक्टर से शिकायत कर कार्यवाही की मांग की गई है.पहाड़ को खोदने का काम मशीनों के माध्यम से बीते कई दिनों से किया जा रहा है.
इधर,नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल द्वारा इस तरह के प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए जो गाइड लाइन जारी की गई है उसका घोर उल्लंघन हो रहा है. इस मामले को लेकर संभागायुक्त को पत्र सौंपते हुए खोदाई रोकने तथा उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई गई है. पिछले डेढ़ दशक से कहीं टूलेन, तो कहीं फोरलेन का निर्माण इंदौर, मुंबई, हैदराबाद की कंपनियों द्वारा किया जाता रहा है. जिसमें रॉ मटेरियल के नाम पर आसपास के तालाबों, छोटे-मोटे पहाड़ों का वजूद तक खत्म कर दिया गया.
संभागायुक्त को आवेदन पत्र सौंपते हुए एड. बीके माला ने उल्लेख किया है कि बुड़वा पहाड़ लगभग 30 एकड़ के परिक्षेत्र में फैला हुआ है जो पत्थर तथा अन्य खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है. साथ ही वृक्षों से भी आच्छादित है. पहाड़ी की चोटी पर वर्षों पुराने मां शारदा के मंदिर में कई अनाम संत, महात्माओं ने तपस्या की थी. इस पहाड़ को निचले हिस्से से खोदकर पत्थर व खनिज संपदाओं का दोहन किया जा रहा है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि इस पहाड़ क्षेत्र की आराजी का पट्टा कैसे हो गया. हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है जो आने वाले दिनों में प्राकृतिक असंतुलन की वजह बनेगा. ऐसे में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराया जाना सार्वजनिक हित में होगा.
समतलीकरण के लिये दी गई अनुमति
जिला खनिज अधिकारी श्रीमती दीपमाला तिवारी ने बताया कि जिस पहाड़ की खोदाई की जा रही है उसका पट्टा स्थानीय निवासियों का है. ऐसे में पट्टेदारों द्वारा जमीन समतलीकरण का आवेदन दिया गया था. जिसके चलते पहाड़ खोदाई के लिए हमारे विभाग से अनुमति दी गई है. इसके लिये पर्यावरण की स्वीकृति की आवश्यकता नही होती
