राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र नहीं, चुनाव प्रक्रिया में भी गड़बड़ी

इंदौर:आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर जगदीप झोकर ने कहा कि जब तक नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, देश में वास्तविक लोकतंत्र नहीं आ सकता। वे अभ्यास मंडल की 64वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है और चुनाव प्रक्रिया में भी गड़बड़ी होती है।

झोकर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका के माध्यम से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की आपराधिक और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने की पहल की थी, जिस पर राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर विरोध किया। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने नोटा को सबसे लोकतांत्रिक विकल्प बताया। झोकरने कहा कि राजनीतिक दल के नाम पर पहचाने जाने वाले राजनीतिक समूह में से भी कोई भी ऐसा नहीं है जिसमें की अंदरूनी लोकतंत्र हो.

उन्होंने कहा कि हमारे देश में चुनाव ईवीएम के माध्यम से होता है, यह मशीन बेलेटिंग यूनिट है जिसके साथ में कंट्रोल यूनिट, वीवीपेट और सिंबल लोडिंग यूनिट जुड़े हुए होते हैं. यह मशीन कितनी बेहतर तरीके से काम करती है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि जितने वोट डाले जाते हैं और जीतने वोट गिने जाते हैं, उसकी संख्या में अंतर होता है.

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