
नवभारत न्यूज
सरई 12 मई। ऊर्जाधानी में प्रदूषण का लेवल लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके कारण एक नही अनेक तरह के हैं। जिसके बारे में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अमला जानकर भी चुप्पी साधी हुई है। वर्तमान में मालगाड़ी भी प्रदूषण फै लाने में पीछे नही हैं। मालगाड़ी के माध्यम से कोयले का परिवहन किया जा रहा है। लेकिन उसमें त्रिपाल नही ढकी जा रही है।
मालगाड़ी में कोयला से भरे वैगनों को तिरपाल से ढके बिना ही परिवहन किया जा रहा है। ऐसे में आए दिन कोयला की चोरी, आगजनी सहित अन्य हो रही है। फिर भी गंतव्य स्थान से रवाना होने पर नियमानुसार जिले से कैमोर, उ.प्र. हरियाणा, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, पंजाब व अन्य कई सिटी सहित अन्य स्थानों पर भारी संख्या में मालगाड़ी के वैगनों में कोयला भरा जाकर भेजा जाता है। सिंगरौली, महदेईया, बरगवां गोंदवाली, गजराबहरा, सरई से एक दिन में करीब दर्जनों से अधिक मालगाड़ी गुजरती है। जिसमें मात्र एक या दो मालगाड़ी के वैगनों को तिरपाल से ढका रहता है। जबकि शेष मालगाड़ी बिना तिरपाल ढके ही संचालित होती है। ऐसे में कोयला में आग की घटनाएं होती रहती है। कोयला अधिक भरा जाने के बाद पानी का छिड़काव किया जाता है। जिससे भार बढ़ जाने पर क्षमता से अधिक वजन बढ़ जाने पर इंजन भी फेल हो जाता है। यदि रेल प्रशासन सख्ती से रेलवे बोर्ड के नियमों का पालन करते हुए कंपनियों व ठेकेदारों को पाबंद कर दे तो ऐसी घटनाओं पर अकुंश लग सकता है। मालगाड़ी में करीब 58 वैगन होते हंै। मालगाड़ी चलने पर कोयला उड़ता भी है। इस कारण प्रदूषण भी फैलता है। जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
