इंदौर: 30 साल बाद हमारे देश में तीनों सेना में से किसी में हम महिला अधिकारी को सेनाध्यक्ष बनते हुए देखेंगे. सेना में काम कर रही महिलाओं को पेंशन योजना का लाभ दिए जाने की जरूरत है. अग्निपथ जैसी योजना सेना की योजना नहीं है.यह बात भारतीय वायु सेवा की सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने कही. वे आज यहां जाल सभागृह में अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित 64 की ग्रीष्मकालीन व्याख्यान माला में भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका विषय पर संबोधित कर रही थी.
उन्होंने अपने सेवा में चयन से लेकर वहां जाकर काम शुरू करने की स्थिति तक की पूरी कहानी से सभी को रूबरू कराया. वायु सेना की सेवा को ज्वाइन करने के लिए उन्हें 1 साल तक कठोर ट्रेनिंग लेना पड़ी. यह ट्रेनिंग महिला, पुरुषों के लिए एक समान होती है. सरकार के द्वारा जब सेना में महिलाओं को लेने का प्रयोग शुरू किया गया था उस समय पर शुरुआत में ही वह सेना में गई थी.
सेना में काम करने वाले पुरुष हो या महिला, सभी का काम एक समान होता है. इस दौरान जब हम वर्दी पहन कर निकलते हैं तो कहीं कोई डर नहीं लगता है. कार्यक्रम का संचालन मनीषा गौर ने किया. आभार प्रदर्शन गौतम कोठारी ने किया. कृपाशंकर शुक्ला ,ओ पी जोशी मनोहर देव ,दिलीप गुप्ते ,सदाशिव कौतुक, प्रीतेश पटेल आदि उपस्थित थे परमानेंट कमीशन का लाभ दिया जाना चाहिए।
