सीजफायर पर देश को क्या मिला जनता को बताएं सरकार – पंकज

*अचानक सीजफायर को लेकर देश जानना चाहता ऐसा क्या हुआ – पंकज*

 

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी सोशल मीडिया के उपाध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि सीज़फायर की खबर सुकून देती है। हमारे सैनिकों की बहादुरी और अनुशासन ने एक बार फिर देश का मान बढ़ाया है।अब ज़िम्मेदारी हमारी भी है कि अफवाहों से दूर रहें और शांति के इस मौके को मजबूती से थामे रखें। सैनिकों के बलिदान का सम्मान यही है,एकजुट रहना,संयम रखना।

पंकज ने आगे कहा कि देश का बच्चा बच्चा जानना चाहता है कि हिन्दुस्तान पाकिस्तान युद्ध में देश ने क्या खोया क्या पाया युद्ध हिन्दुस्तान लड़ रहा था पर शांति वार्ता हुई लेकिन इसकी घोषणा दुनिया के दूसरे छोर बैठे अमेरिका के राष्ट्रपति ने कि इसे क्या माना जाए।

जब इंदिरा गांधी जी 1971 नवंबर में अमेरिका के दौरे पर थीं। व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति निक्सन से मुलाकात हुई।बातचीत शुरू होते ही निक्सन ने घमंड में डूबकर चेतावनी दे डाली “अगर भारत ने पाकिस्तान के मामले में नाक घुसाई, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।

इंदिरा गांधी ने बिना किसी उत्तेजना के, बेहद गरिमामयी अंदाज़ में जवाब दिया:”भारत अमेरिका को मित्र मानता है,मालिक नहीं। हम अपनी किस्मत खुद लिखते हैं।और इतना कहकर वे बैठक छोड़कर उठ गईं।ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं था, ये वो शब्द थे जो इंदिरा गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की आंखों में आंखें डालकर,वाइट हाउस में कहे थे।

बाद में इस पूरी मुलाकात का ज़िक्र अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने अपनी आत्मकथा “White House Years” में किया।उस दिन बैठक के बाद मीडिया को साझा संबोधन होना था — पर इंदिरा गांधी बाहर निकलते ही कार्यक्रम रद्द करके सीधे अपनी कार की ओर बढ़ गईं।कार का दरवाज़ा बंद करते वक्त किसिंजर ने कहा:”मैडम, आपको नहीं लगता कि राष्ट्रपति के प्रति थोड़ा और धैर्य दिखाना चाहिए था?”

इंदिरा गांधी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया:

“धन्यवाद मिस्टर सेक्रेटरी, भारत भले ही विकासशील देश हो, लेकिन हमारी रीढ़ की हड्डी मजबूत है। हमारे पास अत्याचार झेलने की आदत नहीं, बल्कि उसका जवाब देने का साहस है। वो दिन लद चुके जब कोई ताकत हज़ारों मील दूर बैठकर हम पर राज कर सके।”

दिल्ली लौटते ही इंदिरा जी ने जो पहला काम किया, वह था — अपने राजनीतिक विरोधी अटल बिहारी वाजपेयी को घर बुलाना।

घंटे भर बंद कमरे में बातचीत हुई। बाहर निकलते ही खबर आई —

भारत का पक्ष अब संयुक्त राष्ट्र में अटल जी रखेंगे।

बीबीसी के पत्रकार ने चुटकी ली:

“इंदिरा गांधी आपको सबसे बड़ा आलोचक मानती हैं, आप सरकार का पक्ष कैसे रखेंगे?”

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने मुस्कुरा कर जवाब दिया:”बगीचा सिर्फ गुलाब से नहीं महकता,लिली और चमेली से भी होता है। लेकिन जब बगीचे पर संकट आता है तो सभी माली मिलकर उसकी हिफाजत करते हैं।

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