
जबलपुर। चश्मदीद गवाहों के तीन माह बाद दर्ज किये गये पूरक बयान के आधार पर हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण में महिला को आरोपी बनाया गया था। जिला न्यायालय ने महिला के खिलाफ आरोप भी निर्धारित कर दिये थे। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिव्यू आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट जस्टिस डी के पालीवाल ने जिला न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ निर्धारित किये गये आरोप को निरस्त कर दिया है।
रीवा निवासी शिखा द्विवेदी की तरफ से अपील दायर की गई है।
पुलिस ने प्रकरण में सात व्यक्तियों को आरोपी बनाया था। दो चश्मदीद गवाहों ने 20 जुलाई 2023 को बयान दिए थे। दोनों गवाहों के द्वारा लगभग तीन माह बाद 28 सितंबर को पूरक बयान में कहा था कि आरोपियों के साथ एक लड़की भी थी। वह आरोपियों में सिर्फ विपुल उर्फ आशीष मिश्रा को पहचानते थे। तीन माह बाद चश्मदीद गवाहों के पूरक वयान के आधार पर उसे प्रकरण में आरोपी बनाया गया था।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि चश्मदीद गवाहों के द्वारा दर्ज कराई गयी एफ आई आर तथा पूर्व में दर्ज किये गये दो बयान में घटनास्थल पर किसी महिला के उपस्थित होने के संबंध में जानकारी नहीं दी गयी थी। तीन माह बाद दर्ज पूरक बयान में उनके द्वारा महिला की उपस्थित होने की बात कही गयी है। इसके अलावा उनकी पहचान के लिए पुलिस के द्वारा शिनाख्त परेड भी नहीं करवाई गयी थी। एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के घटनास्थल में उपस्थित होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण उसके खिलाफ तय किये गये आरोपों को निरस्त करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में सुचारू रूप से जारी रहेंगी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय ने पैरवी की।
