नयी दिल्ली, 09 मई (वार्ता) विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि विश्व बैंक सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के फैसले में हस्तक्षेप कर सकता है और इस फैसले को पलटने के लिए उसे मजबूर कर सकता है।
केंद्र सरकार के सूचना तंत्र प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ‘एक्स’ पर श्री बंगा के हवाले से एक पोस्ट में कहा है, “ एक मददगार के अलावा हमारी और कोई भूमिका नहीं है। मीडिया में इस बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही हैं कि विश्व बैंक कैसे हस्तक्षेप करेगा और समस्या को कैसे ठीक करेगा, लेकिन ऐसी बातें व्यर्थ हैं। विश्व बैंक की भूमिका केवल मददगार की है। ”
उल्लेखनीय है कि भारत ने सिंधु जल बंटवारे पर भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की संधि को 22 अप्रैल 2025 के पहलगाव आतंकवादी हमले के अगले दिन 23 अप्रैल को स्थगित कर दिया था। कथित रूप से पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाले चार आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। इनमें एक व्यक्ति नेपाल का नागिक था।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने गुरुवार को कहा था कि सिंधु जल संधि जिन परिस्थितियों में संपन्न हुई थी, उनमें मौलिक परिवर्तन हुए हैं… इसकी समीक्षा के लिये पिछले ढाई वर्षों से भारत पाकिस्तान सरकार को लिखता रहा है। श्री मिसरी ने संवाददाताओं से कहा, “ हमने संधि में संशोधन पर चर्चा के लिये वार्ता का अनुरोध करते हुये उन्हें कई नोटिस भेजे हैं। भारत छह दशकों से भी अधिक समय से इस संधि का सम्मान करता आ रहा है, यहां तक कि उस समय भी जब पाकिस्तान ने हम पर कई युद्ध थोपे थे। पाकिस्तान ही संधि का उल्लंघन करता रहा है, जानबूझकर भारत के पश्चिमी नदियों पर अपने वैध अधिकारों का प्रयोग करने में कानूनी बाधायें खड़ी करता रहा है।
उन्होंने यह भी कहा, “ यह भारत का धैर्य ही है कि हम पिछले 65 वर्षों से, इतने उकसावे के बाद भी संधि का पालन करते आ रहे हैं। अब स्थितियां बदल गयी हैं। यह संधि 50 और 60 के दशक की इंजीनियरिंग तकनीकों पर आधारित थी। तकनीकी बदलावों और उन्नति को ध्यान में रखना होगा। ”

