
भोपाल। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भोले-भाले लोगों को ठगने वाले एक शातिर गिरोह के सरगना को भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने धर दबोचा है। यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के कानपुर में की गई, जो साइबर पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है।
आरोपी आजाद पिता भूरी, जिसकी उम्र 38 वर्ष है और जो कानपुर के रठीगांव का रहने वाला है, महज आठवीं कक्षा तक ही शिक्षित है। लेकिन, अपनी कम शिक्षा के बावजूद, वह साइबर ठगी के जाल बुनने में माहिर निकला। पूछताछ में पता चला है कि वह पिछले चार से पांच सालों से इस अवैध धंधे में सक्रिय था।
उसका तरीका-ए-वारदात भी चौंकाने वाला था। वह हिंदी भाषी राज्यों के मोबाइल नंबरों को निशाना बनाता था और कॉलर आईडी में हेरफेर करके नंबरों के आखिरी अंक बदल देता था, जिससे पीड़ितों को शक न हो। फिर वह दिल्ली क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को फोन करता और उन्हें झूठे कानूनी मामलों में फंसाने की धमकी देता था। गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाकर वह पीड़ितों से मामला रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम ऐंठता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आजाद ठगी की रकम हासिल करने के लिए फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। पीड़ितों से इन खातों में पैसे डलवाकर वह खुद ATM के जरिए उन्हें निकाल लेता था। अपने पहचान को छुपाने के लिए वह दूसरे राज्यों के लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड भी इस्तेमाल करता था।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब भोपाल की सुकन्या सिंह (बदला हुआ नाम) ने 28 अप्रैल, 2025 को साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 5 मार्च, 2025 को एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें दिल्ली क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर फोन किया और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद, अलग-अलग बहानों से उनसे कुल ₹ 90,500 की ठगी कर ली गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम ब्रांच की एक टीम कानपुर रवाना हुई और पांच दिनों की अथक मेहनत के बाद आरोपी आजाद को उसके गांव रठीगांव से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपराध में करता था।
