शिमला | हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात वकील अभिषेक मनु सिंघवी को बड़ा कानूनी झटका लगा है। राज्यसभा चुनाव में भाजपा नेता हर्ष महाजन के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका के दौरान सिंघवी ने गवाहों की सूची और क्रॉस एग्जामिनेशन (प्रतिपरीक्षण) की प्रक्रिया को लेकर एक आवेदन दाखिल किया था। सिंघवी का तर्क था कि इस मामले में विस्तृत साक्ष्यों या गवाहों की कोई आवश्यकता नहीं है और इससे सुनवाई में अनावश्यक देरी होगी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनके इन तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका एक ‘ट्रायल बेस्ड’ प्रक्रिया है, जिसमें न्याय के लिए गवाहों और साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
अदालत ने भाजपा नेता हर्ष महाजन द्वारा पेश की गई 16 गवाहों की सूची को पूरी तरह से वैध और प्रक्रिया के अनुरूप माना है। सिंघवी ने आरोप लगाया था कि महाजन ने जानबूझकर लंबी सूची दी है ताकि मामले को लटकाया जा सके, जबकि महाजन के पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा था कि सिंघवी खुद कानूनी पेचीदगियों के जरिए मामले को कमजोर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति ने 10 मार्च को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाते हुए कहा कि गवाहों को हटाने का कोई ठोस आधार नहीं है। अब इस आदेश के बाद मामले का ट्रायल गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगा, जिससे निर्वाचन की वैधता पर विस्तृत सुनवाई सुनिश्चित होगी।
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए हुए मतदान से जुड़ा है। उस समय कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे और भाजपा के हर्ष महाजन विजयी घोषित हुए थे। चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और पर्ची (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) के जरिए निकले परिणाम के बाद सिंघवी ने इस पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट के इस ताजा रुख से सिंघवी की कानूनी राह और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है, क्योंकि उन्हें अब अदालत में गवाहों के बयानों और क्रॉस एग्जामिनेशन के दौर से गुजरना होगा।

