नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (वार्ता) उच्ततम न्यायालय ने सोमवार को बीयरबाइसेप्स के नाम से मशहूर यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया को पॉडकास्ट के काम के लिए विदेश यात्रा के वास्ते पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने आज कहा कि चूंकि पुलिस जांच अब पूरी हो चुकी है, इसलिए अल्लाहबादिया पासपोर्ट वापस प्राप्त करने के लिए महाराष्ट्र साइबर अपराध ब्यूरो में आवेदन कर सकते हैं। न्यायालय ने निर्देश दिया कि उनका पासपोर्ट उचित नियमों और शर्तों के तहत उन्हें वापस किया जाए।
पीठ ने कहा, “हम याचिकाकर्ता को अपना पासपोर्ट जारी करने के लिए आवेदन करने की अनुमति देते हैं। ऐसे आवेदन पर पासपोर्ट उचित शर्तों के तहत वापस किया जाना चाहिए।” न्यायालय ने हालांकि अल्लाहबादिया से कहा कि उसे भारत छोड़ने से पहले अभी भी अनुमति लेनी होगी और अगर उसे फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जाता है, तो उसे पुलिस के साथ सहयोग करना होगा।
गौरतलब है कि अल्लाहबादिया ने पहले भी अपना पासपोर्ट तब सरेंडर किया था। पुलिस अल्लाहबादिया और अन्य लोगों के खिलाफ ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड के दौरान की गई विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर दर्ज आपराधिक मामलों की जांच कर रही है। शीर्ष अदालत ने पहले ही अल्लाहबादिया को विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों को एक साथ जोड़ने के उनके अनुरोध पर विचार करते हुए कुछ शर्तों के तहत गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था।
इससे पहले, 01 अप्रैल को, अल्लाहबादिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ ने तर्क दिया कि यात्रा प्रतिबंध यूट्यूबर की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहे हैं, क्योंकि उसे अपने पॉडकास्ट के लिए मेहमानों का साक्षात्कार करने के लिए यात्रा करने की आवश्यकता है।
श्री चंद्रचूड़ ने आज न्यायालय से अनुरोध किया कि वह अल्लाहबादिया के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर) को एक साथ जोड़ने के लिए बहस करने की अनुमति दे। उन्होंने कहा कि हालांकि असम की एफआईआर मुंबई की एफआईआर से अधिक विस्तृत हो सकती है, लेकिन दोनों एक ही घटना से उत्पन्न हुई हैं। न्यायालय ने शुरू में देखा कि एफआईआर में समान सामग्री नहीं हो सकती है, लेकिन बाद में इस मुद्दे पर आगे की दलीलें सुनने के लिए सहमत हो गया।
यह विवाद 14 नवंबर, 2024 को खार हैबिटेट में रिकॉर्ड किए गए ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड से उपजा है, जिसे बाद में प्रसारित किया गया था।
इलाहाबादिया अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक अन्य यूट्यूबर आशीष चंचलानी ने भी असम में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने या वैकल्पिक रूप से मामले को मुंबई स्थानांतरित करने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय पहले ही चंचलानी को अग्रिम जमानत दे चुका है।
शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान एपिसोड में दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की थी, उन्हें विकृत और गंदी मानसिकता बताया था। पीठ ने सवाल किया था कि क्या इस तरह के अश्लील भाषण को कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में संरक्षित किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा था कि इस्तेमाल किए गए शब्द समाज, माता-पिता और महिलाओं के लिए बेहद अपमानजनक हैं।
इसके बावजूद न्यायालय ने अल्लाहदिया को गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा दी थी, लेकिन शुरुआत में उन्हें शो होस्ट करने से प्रतिबंधित कर दिया थी। बाद में उस प्रतिबंध को हटा दिया गया, जिससे उन्हें अपने पॉडकास्ट जारी रखने की अनुमति मिल गई, बशर्ते कि वे अपनी सामग्री में शालीनता बनाए रखें।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि वह बाद में ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने और अश्लील सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने पर विचार कर सकता है।
