स्वतंत्रता सेनानियों की अमर प्रेरणा को जीवित रखना है: मोदी

नयी दिल्ली 27 अप्रैल (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों की अमर प्रेरणाओं को जीवित रखने का आह्वान करते हुए रविवार को कहा कि उनकी ऊर्जा

अमृतकाल के संकल्पों को नयी मजबूती देती है।

श्री मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 121वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि 10 मई को, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगांठ है। आज़ादी की उस पहली लड़ाई में जो चिंगारी उठी थी, वह आगे चलकर लाखों सेनानियों के लिए मशाल बन गई। उन्होंने कहा, “अभी 26 अप्रैल को हमने 1857 की क्रांति के महान नायक बाबू वीर कुंवर सिंह की पुण्यतिथि भी मनाई है। बिहार के महान सेनानी से पूरे देश को प्रेरणा मिलती है। हमें ऐसे ही लाखों स्वतंत्रा सेनानियों की अमर प्रेरणाओं को जीवित रखना है। हमें उनसे जो ऊर्जा मिलती है, वो अमृतकाल के हमारे संकल्पों को नई मजबूती देती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 108 साल पहले वर्ष 1917 अप्रैल और मई के यही दो महीने – देश में आजादी की एक अनोखी लड़ाई लड़ी जा रही थी। अंग्रेजों के अत्याचार उफान पर थे। गरीबों, वंचितों और किसानों का शोषण अमानवीय स्तर को भी पार कर चुका था। बिहार की उपजाऊ धरती पर ये अंग्रेज किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे। नील की खेती से किसानों के खेत बंजर हो रहे थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को इससे कोई मतलब नहीं था। ऐसे हालात में, 1917 में गांधी जी बिहार के चंपारण पहुंचे हैं। किसानों ने बताया कि जमीन मर रही है, खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है। लाखों किसानों की उस पीड़ा से गांधी जी के मन में एक संकल्प उठा। वहीं से चंपारण का ऐतिहासिक सत्याग्रह शुरू हुआ। ‘चंपारण सत्याग्रह’ ये बापू द्वारा भारत में पहला बड़ा प्रयोग था। बापू के सत्याग्रह से पूरी अंग्रेज हुकूमत हिल गई। अंग्रेजों को नील की खेती के लिए किसानों को मजबूर करने वाले कानून को स्थगित करना पड़ा। ये एक ऐसी जीत थी जिसने आजादी की लड़ाई में नया विश्वास फूंका।

श्री मोदी ने कहा कि इस सत्याग्रह में बड़ा योगदान बिहार के एक और सपूत का भी था, जो आजादी के बाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। वो महान विभूति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद थे। उन्होंने ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर एक किताब “सत्याग्रह इन चंपारण” लिखी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक हर युवा को पढ़नी चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कई और अमिट अध्याय जुड़े हुए हैं। अप्रैल की छह तारीख को ही गांधी जी की ‘दांडी यात्रा’ संपन्न हुई थी। 12 मार्च से शुरू होकर 24 दिनों तक चली इस यात्रा ने अंग्रेजों को झकझोर कर रख दिया था। अप्रैल में ही जलियाँवाला बाग नरसंहार हुआ था। पंजाब की धरती पर इस रक्तरंजित इतिहास के निशान आज भी मौजूद हैं।

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