नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आमतौर पर समझा जाता है कि सेव की पैदावार पहाड़ों पर होती है लेकिन कर्नाटक में अधिक तापनान में भी सेव की खेती में सफलता मिली है।
श्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में आज कहा, “एक बड़ी पुरानी कहावत है ‘जहां चाह-वहां राह’। जब हम कुछ नया करने की ठान लेते हैं, तो मंजिल भी जरूर मिलती है। आपने पहाड़ों में उगने वाले सेब तो खूब खाए होंगे, लेकिन, अगर मैं पुछूँ कि क्या आपने कर्नाटक के सेब का स्वाद चखा है ? तो आप हैरान हों जाएंगे। आमतौर पर हम समझते हैं कि सेब की पैदावार पहाड़ों में ही होती है, लेकिन कर्नाटक के बागलकोट में रहने वाले श्री शैल तेली जी ने मैदानों में सेब उगा दिया है। उनके कुलाली गांव में 35 डिग्री से ज्यादा तापमान में भी सेब के पेड़ फल देने लगे हैं। दरअसल श्री शैल तेली को खेती का शौक था तो उन्होंने सेब की खेती को भी आजमाने की कोशिश की और उन्हें इसमें सफलता भी मिल गई। आज उनके लगाए सेब के पेड़ों पर काफी मात्रा में सेब उगते हैं जिसे बेचने से उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब जब सेबों की चर्चा हो रही है, तो आपने किन्नौरी सेब का नाम जरूर सुन होगा। सेब के लिए मशहूर किन्नौर में केसर का उत्पादन होने लगा है। आमतौर पर हिमाचल में केसर की खेती कम ही होती थी, लेकिन अब किन्नौर की खूबसूरत सांगला घाटी में भी केसर की खेती होने लगी। ऐसा ही एक उदाहरण केरल के वायनाड का है। यहां भी केसर उगाने में सफलता मिली है।
उन्होंने कहा, “कुछ ऐसा ही हैरत भरा काम लीची की पैदावार के साथ हुआ है। हम तो सुनते आ रहे थे कि लीची बिहार, पश्चिम बंगाल या झारखंड में उगती है, लेकिन अब लीची का उत्पादन दक्षिण भारत और राजस्थान में भी हो रहा है। तमिलनाडु के थिरु वीरा अरासु, कॉफी की खेती करते थे। कोडईकनाल में उन्होंने लीची के पेड़ लगाए और उनकी सात साल की मेहनत के बाद अब उन पेड़ों पर फल आने लगे। लीची उगाने में मिली सफलता ने आसपास के दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया है। राजस्थान में जितेंद्र सिंह राणावत को लीची उगाने में सफलता मिली है। ये सभी उदाहरण बहुत प्रेरित करने वाले हैं।
श्री मोदी ने कहा कि अगर हम कुछ नया करने का इरादा कर लें और मुश्किलों के बावजूद डटे रहें, तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
