
भोपाल। मप्र में नर्सिंग घोटाले के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही गंभीर संकट से जूझ रही है। शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हजारों स्टाफ नर्स के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई स्टाफ नर्स भर्ती अधिसूचना पर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने कड़ी आपत्ति जताई है।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने राज्य सरकार पर हजारों पंजीकृत नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी की गई तथाकथित “बंपर भर्ती” में पूरे प्रदेश के लिए मात्र सात पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदेश में हजारों पद खाली हैं।
परमार ने यह भी आरोप लगाया कि इस भर्ती प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था की भावना के विरुद्ध बताया।
भोपाल एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि इतनी सीमित भर्ती से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और कमजोर होंगी तथा योग्य युवाओं को अवसर नहीं मिल पाएगा। संगठन ने सरकार से रिक्त पदों का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करने, बड़े स्तर पर नियमित भर्ती निकालने और आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
