भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और प्रदेश में फर्जी अस्पतालों का एक संगठित नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में संचालित हो रहा है, यह गंभीर आरोप एनएसयूआई ने लगाया है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारी न केवल ऐसे फर्जी अस्पतालों को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
परमार ने कहा कि एनएसयूआई लंबे समय से फर्जी अस्पतालों, अपात्र डॉक्टरों और केवल कागजों में दर्ज नर्सिंग स्टाफ को लेकर शिकायतें उठाती रही है, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय अधिकारी ऐसे संस्थानों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग ने अब एक “अत्यंत संदिग्ध कदम” उठाते हुए अपने ऑनलाइन पोर्टल से पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का विवरण हटा दिया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से एक ही डॉक्टर या नर्स को एक साथ आठ से दस अस्पतालों में कार्यरत दिखाना आसान हो जाएगा और आम जनता के पास इसकी जांच का कोई माध्यम नहीं बचेगा। परमार ने इसे सीधे तौर पर अस्पताल माफियाओं को लाभ पहुंचाने वाला और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक कदम बताया।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि रिश्वत लेकर फर्जी अस्पतालों को अवैध संरक्षण देने के लिए जाली भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं।
तोमर ने कहा कि नागरिकों को यह जानने का मूल अधिकार है कि अस्पतालों में विधिवत पंजीकृत डॉक्टर और स्टाफ मौजूद हैं या नहीं। इस जानकारी को हटाकर पारदर्शिता को जानबूझकर खत्म किया गया है।एनएसयूआई ने ऑनलाइन पारदर्शिता तत्काल बहाल करने, फर्जी पंजीकरण की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फर्जी अस्पतालों के लाइसेंस तत्काल रद्द करने की मांग की है। परमार ने चेतावनी दी कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो एनएसयूआई प्रदेशव्यापी आंदोलन और कानूनी कार्रवाई करेगी।
