जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सिंधु जल संधि सबसे अनुचित दस्तावेज: उमर

श्रीनगर, 25 अप्रैल (वार्ता) भारत सरकार की ओर से 1960 की सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को ‘स्थगित’ किये जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस संधि को प्रदेश के लोगों के लिए सबसे अनुचित दस्तावेज बताया।

श्री अब्दुल्ला ने श्रीनगर में संवाददाताओं से कहा, “भारत सरकार ने कुछ कदम उठाये हैं। जहां तक ​​जम्मू-कश्मीर का सवाल है, ईमानदारी से कहें तो हम कभी भी सिंधु जल संधि के पक्ष में नहीं रहे हैं। हमारा हमेशा से मानना ​​रहा है कि सिंधु जल संधि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सबसे अनुचित दस्तावेज है।”

गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा 25 पर्यटकों और एक स्थानीय व्यक्ति की हत्या के एक दिन बाद बुधवार को भारत ने 1960 की जल-बंटवारे की संधि को रोकने का फैसला किया। एक दिन बाद पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के निलंबन को ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया था।

सिंधु जल संधि पर 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तान के राष्ट्रपति मार्शल मोहम्मद अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के प्रावधानों के तहत, भारत को पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी के पानी तक अप्रतिबंधित पहुंच प्रदान की गयी थी, वहीं पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब सहित पश्चिमी नदियों के पानी पर अधिकार मिला।

 

 

 

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