निजी टैंकरों से पानी खरीदने को लोग मजबूर, फायदा उठाकर बढ़ाए पानी के दाम

सीहोर। गर्मी के विकराल रूप धरते ही जहां पानी की किल्लत गहराने लगी है. लोग खाली बर्तन लेकर भटकने को मजबूर हो उठे हैं. ऐसे में उनकी बेबसी का फायदा उठाते हुए टैंकर संचालकों ने पानी के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है. कुछ दिन पूर्व तक 300 रुपए में मिलने वाले टैंकर के पानी की कीमत लोगों को 450 से 500 रुपए अदा करना पड़ रही है.

शहर की प्यास बुझाने का दारोमदार निभाने वाले जमोनिया, भगवानपुरा तालाब और काहिरी बंधान का जल स्तर तेजी से गिर रहा है. जिससे शहर के 50 प्रतिशत से अधिक कुएं और नलकूप जवाब दे गए हैं. इससे शहर में पेयजल संकट गहराने लगा है. शहर के कई क्षेत्रों में लोगों ने नल कनेक्शन नहीं लिए हैं और कई हिस्सों में नल सप्लाई नहीं की जाती. जिसके चलते वहां के लोग बोर के पानी पर ही निर्भर रहते हैं. जब गर्मी में बोर सूख जाते हैं तो लोगों को टैंकर डलवाने पड़ते हैं. निजी टैंकरों की मांग बढ़ते ही उन्होंने भी दाम बढ़ाकर 450 रुपए प्रति टैंकर कर दिया है.

शहरी क्षेत्र में गर्मी की दस्तक के साथ ही जल संकट की आहट आने लगी है. अभी से यह स्थिति हो गई है कि 20 रुपए कुप्पी और 450 रुपए टैंकर में पीने का पानी बिकने लगा है. ऐसे में प्रशासन वह दावे हवा हवाई नजर आ रहे हैं जिसमें कहा जा रहा था कि 30 जून तक के लिए पर्याप्त पेयजल भंडारण है. नपा ने शहरों में पानी की जो व्यवस्था की है वह अपर्याप्त है. शहर में जमोनिया, भगवानपुरा तालाब और काहिरी डैम से पानी की सप्लाई की जाती है. यह स्त्रोत भी शहर की बढ़ती जनसंख्या के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं. शहर के कई वार्ड में बोर के जरिए पानी की सप्लाई की जाती है. जल स्तर कम होने से यह बोर भी सूखने लगे हैं. ऐसे में इन क्षेत्रों के लोगों को भी जल संकट का सामना करना पड़ रहा है. यह सभी लोग अब टैंकरों पर ही निर्भर हैं.

सीटू नाला, सीवन नदी, जमोनिया तालाब सूखने के बाद शहर के नल विहीन क्षेत्रों में परेशानी और बढ़ जाएगी. इसके बाद लगभग 90 प्रतिशत घरों में टैंकर से ही पानी आता है. जिसके बाद बाजार में 4-5 हजार लीटर के टैंकर के दाम 300 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए प्रति टैंकर तक हो जाएंगे. वहीं यदि संकट और बढ़ा तो दाम इससे भी ज्यादा हो सकते हैं. वहीं इस मामले में टैंकर संचालकों का कहना है कि कुएं व ट्यूबवेल वाले ही पानी भरने के रुपये बढ़ा देते हैं, जिससे हमें भी दाम बढ़ाने पड़ते हैं.

निगरानी के बाद भी संरक्षित जल की चोरी जारी

नपा ने सप्लाई के लिए जिन स्त्रोतों में पानी संरक्षित किया उनसे चोरी हो रही है. इन जल स्त्रोतों के आसपास के किसान मूंग की फसल की बोवनी भी कर देते हैं. जिसकी सिंचाई वे इन्हीं जल स्त्रोतों से करते हैं. जिससे पानी तेजी से कम होता है. यदि पानी की चोरी पर लगाम नहीं लगाई तो आने वाले दिनों में प्रशासन को खासा मशक्कत करनी पड़ेगी. जब तापमान 44 डिग्री सेल्सियस होगा तब शहर में जल संकट इतना गहरा जाएगा कि तब प्रशासन को व्यवस्था संभालने में भी खासी मुश्किल सकती है. वर्षा के बाद प्रशासन द्वारा जमोनिया, भगवानपुरा और काहिरी जलाशय से नगर में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है.

30 जून तक पर्याप्त पानी देते रहेंगे

नगरपालिका द्वारा नलों के माध्यम से नियमित जल प्रदाय किया जा रहा है. तालाब और काहिरी बंधान में भी पर्याप्त पानी है. हमारे द्वारा संरक्षित पानी को सुरक्षित रखने निगरानी की जा रही है. आगामी 30 जून तक के लिए शहर की प्यास बुझाने पर्याप्त पानी है.

भूपेन्द्र दीक्षित
सीएमओ, नगरपालिका

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